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शराब की दुकानों से सटी चाय की दुकानों पर "सजती है टेबलें"

शराब की दुकानों से सटी चाय की दुकानों पर

"गर्म चाय" की आड़ में "ठंडी चाय" की दुकानदारी.......

     -सुशील चौहान -
भीलवाड़ा। शहर में शराब की दुकानों से शराब खरीदने के बाद वही  सटी दुकानों पर बैठ कर "सुरापान" करने वालों की "अक्ल" ठिकाने लगाने के लिए उपखंड अधिकारी ओम प्रभा ने "हिम्मत" दिखाई । सत्यम काम्प्लेक्स में शराब की दुकानों से शराब लेकर वही पिछवाड़े में "चाय" के नाम पर खोली गई दुकानें दिन भर "मयखाना" बनी रहती है। वही से "दारू" खरीदो ओर पास के "चाय की दुकान" के अंदर बाहर जहां "ठीक लगे बैठो" ओर "शुरू हो जाओ"। एक तो मुसीबत बन चुका  कोरोना उस पर खुले में "मदिरा पान" के "नजारे" । कार्यवाही तो बाजिब थी । वैसे यहाँ तो "पियक्कड़ मिलन" हर रोज़ होता है लेकिन प्रशासन में ऐसे "अधिकारी" कम ही आते है जो इतनी "साहसी" कार्यवाही को "अंजाम" देते है। एसडीएम ओम प्रभा जी  की  "साहस" दिखाकर इन "गर्म चाय" की आड़ में "ठंडी चाय" पालने वालों के खिलाफ  की गई इस कार्यवाही से आम जन "खुश" हैं। साथ ही यह भी कहना चाह रहा है कि शहर में हर शराब की दुकान के पास इस तरह के अवैध काम हो रहे है और वहाँ कोई रोक टोक नहीं है। वैसे यह काम "एरिये" की "पुलिस" का होता है लेकिन "कौन सुनेगा किस को सुनाए" इसलिए चुप रहते है कि तर्ज़ पर सब चल रहा है।
सत्यम् काम्प्लेक्स तो थड़ी पर बैठ कर शराब पीने का बहुत ही पुराना मयखाना हैं। यहां तो बरसों से पिछवाड़े में बेखौफ सुरापान की खुली छूट हैं और यह छूट कोई यूं ही नहीं मिलती इसके सम्बंधित कानून के रखवालों "न्यौछावर" देनी पड़ती हैं। हल्के के वर्दीधारी को सब पता हैं लेकिन " न्यौछावर" के आगे "नतमस्तक" हैं। सत्यम् काम्प्लेक्स ही नहीं इस क्षेत्र के  सम्बंधित थाने से कुछ ही दूरी बने मयखाने के यही नजारे हैं। इसके अलावा बड़ला चौराहा भी कम नहीं हैं यहां तो दुकान संचालक बेखौफ होकर कहते हैं अरे यही बैठ कर पीओ कोई कुछ नहीं कहेगा। यह लो ठंडा पानी, गिलास और बफ।और हो जाओ शुरू। कोई कहेगा कैसे हम न्यौछावर जो देते हैं।  बस स्टेंड के सामने की दुकानें तो खुलने के साथ ही " चमन " हो जाती हैं।मदिरा की सब दुकानों व आस पास की दुकानों पर बिठाकर "शराब पिलाने और चकने" की पूरी व्यवस्था रहती हैं। यहां तक की दुकान बंद होने के बाद भी "दस बीस" अधिक देने पर आपको सुरा आसानी से मिलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। दुकानदार शटर तो नीचे करते हैं मगर ताले नहीं लगाते हैं। शहर के किसी भी क्षेत्र में चले जाओ मयखाने ऐसे ही आबाद मिलेंगे। पटरी पार के भी यही हालात हैं। इन पर लगाम कसने के लिए " ओम प्रभा" जैसी साहसी अधिकारी की जरूरत हैं। तभी अवैध मयखानों पर अंकुश लग पाएगा।