भाई-बहनों में विवाद-तीन घंटे शमशान में पड़ा रहा मां का शव, प्रशासन की समझाइश पर शांत हुआ विवाद

भीलवाड़ा। अस्सी वर्ष की एक बुजुर्ग महिला की बेटी के यहां मौत के बाद शव के दाह-संस्कार को लेकर भाई-बहनों के बीच विवाद खड़ा हो गया। बेटियां, मां के शव का अंतिम संस्कार अपने ससुराल में, जबकि भाई भीलवाड़ा में करने को लेकर जिद पर अड़ गये। इस विवाद के चलते शव करीब तीन घंटे तक श्मशान में पड़ा रहा। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर समझाइश की, तब जाकर शव का बीगोद में ही दाह-संस्कार हो पाया।
बीगोद थाना प्रभारी मूलचंद वर्मा ने हलचल को बताया कि बिगोद कस्बे में सोमवार सुबह भीलवाड़ा के पुरानी धानमंडी निवासी देऊ (80)पत्नी स्व. रामचंद्र की मौत हो गई थी। देऊ पिछले 8-9 माह से अपनी बड़ी बेटी गीता के पास बीगोद में ही थी। मृतका के पति रामचंद्र की मौत भी बीगोद में हुई थी। मृतका के गीता के अलावा बेटे और बेटियां है। बेटों व बेटियों के बीच संपत्ति को लेकर पहले से विवाद की भी चर्चा है।
सोमवार को वृद्धा की मौत होने के बाद शव को उसकी बेटिया और समाज के लोग बीगोद में ही उसका अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान ले गए थे। इसकी सूचना मिलने के बाद भीलवाड़ा से 2 बेटे भी वहां पहुंच गए और मां के शव को भीलवाड़ा ले जाने लगे। इसका बेटियों ने विरोध करते हुये दाह-संस्कार बीगोद में ही करवाने की बात कही। वहीं बेटे भी अपनी जिद पर अड़े रहे, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
भाई - बहनों के आपसी विवाद के चलते सोमवार को एक बुजुर्ग महिला का शव तीन घंटे तक श्मशान के बाहर पड़ा रहा है। बेटियां अपनी मां का अंतिम संस्कार अपने ससुराल में ही करवाना चाहती थी। इधर, भाई अपनी मां का अंतिम संस्कार भीलवाड़ा करवाना चाहते थे। विवाद की सूचना पर मांडलगढ़ एसडीएम महेश गागोरिया, सीओ कीर्तिसिंह, नायब तहसीलदार राहुल धाकड़, बीगोद थाना प्रभारी मूलचंद वर्मा व काछोला थाना प्रभारी दिलीप सिंह मौके पर पहुंच गया। दोनों ही पक्षों को शांत कर अधिकारियों ने बीगोद श्मशान पर ही देऊ के शव का अंतिम संस्कार करवाया।
