जिला कृषि विकास समिति की बैठक संपन्न

उदयपुर। जिला कलक्टर ताराचंद मीणा ने कहा कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी जिले में कृषि जगत में कुछ अनूठा काम नजर नहीं आता है। विभाग काश्तकारों के हित में आवंटित लक्ष्यों पर फोकस करने के साथ-साथ लीक से हटकर कुछ नवाचार भी करें ताकि किसानों का कल्याण हो सके व उनकी माली हालत में सुधार आवें।
कलक्टर मीणा मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कृषि विकास कार्यक्रमों के प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण, उद्देश्यपरक एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए गठित जिला कृषि विकास समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।
इस मौके पर उन्होंने कृषि व उद्यान विभाग को राज्य मुख्यालय से आवंटित लक्ष्यों को अर्जित नहीं कर पा सकने की स्थिति पर नाराजगी जताई और कहा कि विभागीय अधिकारी लक्ष्यों के अनुरूप कार्य योजना बनाते हुए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जुट जावें।
कलक्टर ने कृषि प्रसंस्करण नीति के तहत अपेक्षित प्रस्ताव तैयार कर भिजवाने के निर्देश दिए और जिले में औषधीय वनस्पतियों के लुप्त होने पर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण-संवर्धन के साथ-साथ मार्केटिंग पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
इस दौरान कृषि व उद्यान विभाग की वर्ष 2023-24 की कार्ययोजना की समीक्षा के साथ-साथ आत्मा परियोजना की भी समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक माधोसिंह चंपावत, उपनिदेशक बीएल आमेटा, आत्मा परियोजना निदेशक सुधीर वर्मा ने विभागीय गतिविधियों के बारे में बताया। जिला परिषद सीईओ सलोनी खेमका व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इन विषयों पर भी हुई चर्चा :
कलक्टर मीणा ने प्रगतिशील किसानों को 15 अगस्त पर सम्मानित करवाने का सुझाव दिया और कृषि योजनाओं के गांव-ढाणी तक प्रचार-प्रसार करने की बात कही। उन्होंने जिले में मिलेट्स को बढ़ावा देने का आह्वान किया तथा किसानों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण के बाद फॉलोअप लेने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सड़क पर वनोपज को लेकर खड़े होने वाले बच्चों व महिलाओं के लिए सीताफल मंडी जैसा मार्केट तैयार करने की बात कही। कलक्टर ने जिले के 25 हजार राजीविका समूहों की 3 लाख महिलाओं को कृषि योजनाओं की जानकारी देने व आयजनक गतिविधियों का प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश भी दिए। कलक्टर ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए और खराबे व सहायता देने में आने वाले गेप को कम करने का सुझाव दिया।
