चित्तौडग़ढ़ में कालिका माता मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़, होती है मनोकामनाएं पूरी

चित्तौडग़ढ़ में कालिका माता मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़, होती है मनोकामनाएं पूरी
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भीलवाड़ा (प्रकाश चपलोत)। मेवाड़ के प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक चित्तौडगढ़ दुर्ग स्थित कालिका माता का विख्यात मंदिर है, जहां सालभर श्रद्धालु आते है और माता से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए अर्जी लगाते हैं. खासतौर पर चेत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में मां के दरबार में आने वाले हजारों श्रृद्धालुओं की मौजूदगी से यहां विशाल मेले का आभास होता है. 
जानकारी के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध एतिहासिक चित्तौडगढ़ दुर्ग के नाम से इस शक्ति पीठ से की पहचान है. लगभग 750 वर्ष पूर्व तत्कालीन मेवाड़ शासकों के समय यहां विशाल सूर्य मन्दिर था लेकिन संवत 1305 में मुगल आक्रमण के दौरान हुई तोडफ़ोड़ के बाद महाराणा हमीर सिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर यहां कालिका माता की मूर्ति स्थापित की लेकिन यह दुर्ग हमेशा युद्ध क्षेत्र बना रहा, जिसके चलते क्षत्रिय महाराणा अपनी आराध्य कालिका माता की प्रतिमा युद्ध के मैदान में विजय प्राप्ति के लिए अपने साथ ले जाते थे. इससे मंदिर सुना हो जाने पर यहां पूजा आराधना नियमित नहीं हो पाती थी. इसे ध्यान में रखते हुए श्वेत वर्ण अंबा माता की प्रतिमा स्थापित की गई और उसी के साथ मां कालिका की प्रतिमा स्थापित की गई. 
महंत रामनारायण पुरी ने बताया कि श्रद्धालु माता के दरबार में आकर पाती स्वरुप अपनी मनौती मांगते है और मनोकामना पूर्ण होने पर माता को भेट चढ़ाते हैं. यहां रविवार और त्योहारों के अवसर पर भारी भीड़ होती है. मंगला दर्शन और संध्या आरती दर्शनार्थियों के लिए विशेष आकर्षण होते है. यहां आने वाले हर श्रद्धालु को विश्वास है कि मां कालिका के दर्शन मात्र से उनको संकटों से मुक्ति मिलेगी और उनकी मुरादे पुरी होगी इसलिए देश के कोने-कोने से हजारो दर्शनार्थी आते हैं.
नवरात्रि के उपलक्ष में माता के आभूषण ट्रेजरी से निकाले जाते हैं. कालिका माता के लाखों रुपये के जेवरात सुरक्षा की दृष्टि से जिला कोषागार में रखवाए जाते हैं, जहां से नवरात्रि के अवसरों पर मन्दिर के महंत और प्रशानिक अधिकारियों की मौजूदगी में निकाले जाते हैं. इस दौरान पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं.
चैत्र नवरात्रि स्थापना के एक दिन पहले हमेशा की तरह जिला कोषागार में रखे कालिका माता के जेवरात महंत राम नारायण पुरी, तहसीलदार शिव सिंह, जिला कोषाधिकारी लखावत, मंदिर के लेखाकर नाथूलाल भन्डारी, पं. अरविंद भट्ट आदि मौजूद रहे थे। सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति में कालिका माता करीब सवा किलो वजनी स्वर्ण आभूषण, जिसमें चार मुकूट, एक रमझूल, तमनिया, चंद्रहार, बिंदिया आदि शामिल हैं।
 

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