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इश्क बेशक कमीना हो गया है जी

इश्क बेशक कमीना हो गया है जी

 

इश्क कमीना हो गया है जी और इतना कमीना हो गया है कि इसके गीत गाए जाने लगे हैं और कहानियां सुनायी जाने लगी हैं, बल्कि अब तो यह धर्मोपदेश देने के भी काम आने लगा है। यूं तो इश्क, प्यार और मोहब्बत की कहानियां न जाने कब से सुनी और सुनायी जाती रही हैं, लेकिन यह वह इश्क था, जो उदात्त था, जिसमें जान की बाजी लगा दी जाती थी। प्राणों का उत्सर्ग कर दिया जाता था। यह इंसान को और बेहतर इंसान बनाता था, उसे और ज्यादा संवेदनशील बनाता था। लेकिन जब से यह इश्क कमीना हुआ है, यह अपने प्राणों की बाजी नहीं लगाता, बल्कि दूसरों के प्राण लेता है। यह इंसान को और बेहतर इंसान नहीं, हैवान बनाता है।

प्रेम निवेदन अब चाकू की नोक पर होता है और इसकी परिणति बर्बर हत्या के रूप में सामने आती है। अब यह तेजाब फेंककर इश्क का इजहार करने से आगे बढ़ गया है। अब यह खेतों में पेड़ पर लटके आशिक और माशूक के जीवन उत्सर्ग से आगे बढ़ गया है। पहले इश्क में दिल के टुकड़े हजार होते थे और ढ़ूंढ़ते फिरते थे कि कोई यहां गिरा, कोई वहां गिरा। लेकिन अब तो शरीर के ही छत्तीस टुकड़े हो जाते हैं और यह टुकड़े सड़कों, खेतों, जगलों और न जाने कहां-कहां बिखरे मिलते हैं- बटोरे जाओ।

इश्क बेशक कमीना हो गया है जी, पर है यह बड़े काम का। यह वैसे काम का नहीं है, जैसे खोटा सिक्का कई बार काम का निकल आता है। अब यह खोटे सिक्के से ब्लड मनी में तब्दील हो गया है। अब तो यह इतने काम का है कि इसे दिखाकर धर्म की रक्षा की दुहाई दी जा सकती है। इसे दिखाकर अपने धर्म पर गर्व न करने वालों की लानत-मलानत की जा सकती है। बल्कि अब तो यह चुनाव में भी काम आने लगा है। यह कमीना इश्क अब एक वोट बटोरू नुस्खा हो गया है। अब इस इश्क कमीने को दिखाकर उसी तरह से चुनाव जीता जा सकता है जैसे आतंकवाद को दिखाकर चुनाव जीता जा सकता है। वक्त भी पता नहीं जी, क्या-क्या दिन दिखा रहा है कि कभी देशभक्ति के नाम पर, देशभक्तों की शहादत के नाम पर वोट मांगे जाते थे, लेकिन अब कमीने इश्क को दिखाकर, सूटकेसों में बंद शवों को दिखाकर वोट मांगे जा रहे हैं और चुनाव लड़े जा रहे हैं। इश्क में जो काम खाप पंचायतों के जिम्मे था, इश्क कमीने में वही काम धर्मध्वजा उठाने वालों ने ले लिया है। और दोषी फिर वही कन्याएं हैं, जो प्रेम की डगर पर चलने की ठान लेती हैं। भैया सचमुच बहुत कठिन है डगर पनघट की यानी इश्क की। सचमुच यह आग का दरिया और डूब के जाना है।