मोक्ष मार्ग को जानने समझने के लिए जिनवाणी ही सक्षम माध्यम :  साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री

मोक्ष मार्ग को जानने समझने के लिए जिनवाणी ही सक्षम माध्यम :  साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री
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उदयपुर । श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में बुधवार को चातुर्मासिक मांगलिक प्रवचन में साध्वियों ने श्रावक जीवन के 36 कर्तव्य के विवेचन के बारे में बताया । महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।
 चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने कहां कि कि परमात्मा की जिनवाणी को श्रवण करने से जीवन में संवेग और वैराग्य भाव की अभिवृद्धि होती है। मोक्ष मार्ग को जानने समझने के लिए जिनवाणी ही सक्षम माध्यम है। ब्लोटिंग पेपर बने- पेपर दो प्रकार के आते है और ब्लोटिंग पेपर और प्लास्टिक कोटेड पेपर १ ब्लोटिंग पेपर- यानी (स्याही चूस कागज) पर स्याही की बूंदे गिरती हैं और वह पेपर उन्हें सोख लेता है- अपने अंदर उतार लेता है। 2. प्लास्टिक कोटेड पेपर-पर स्याही की बूंदे गिरती हैं, परन्तु वे वैसी ही रहती है अंदर जाती ही नहीं हैं। श्रोता भी दो प्रकार के होते है  हमें स्याही चूस पेपर जैसा बनना है न कि प्लास्टिक पेपर जैसा, परमात्मा ने बताया कि जो जिनवाणी के श्रवण में राग वाला है और जो भाव से जिनवाणी के शब्दों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता है, संक्लेश रहित वह निर्मल आत्मा अल्प संसारी होती है। हमें परमात्म वाणी का श्रवण आदर भाव पूर्वक करना चाहिये।
जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
 

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