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दर्शन विशुद्धि का महान आलंबन है प्रभु प्रतिमा

दर्शन विशुद्धि का महान आलंबन है प्रभु प्रतिमा

 उदयपुर BHN  जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में चेतक शिक्षा भवन चौराहा स्थित पद्मनाथ स्वामी मंदिर में आचार्य अशोक सागर सुरिश्वर महाराज, आचार्य सोमचंद्र सागर सुरिश्वर एवं आचार्य विवेक सागर सुरिश्वर महाराज आदि ठाणा संघ का मंगल प्रवेश सोमवार गाजे बाजे के साथ हुआ।  पद्मनाथ स्वामी तीर्थ कमेटी के कुलदीप नाहर ने बताया कि आचार्य संघ ने सुबह 7 बजे आयड़ तीर्थ से विहार कर पद्मनाथ मंदिर में प्रवेश किया उसके बाद वहां आचार्य संघ के सानिध्य में आरती, मंगल दीपक, सुबह सर्व औषधी से महाअभिषेक एवं अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।  आचार्य संघ को प्रवचन के पश्चात कामली ओढ़ाई गई।  इस दौरान आयोजित धर्मसभा में आचार्य ने कहां कि आत्मा में अनंत गुण है मगर उन गुणों में सम्यम् दर्शन सम्यग् ज्ञान, सम्यग् चारित्र ये मुख्य गुण हैं। इन्हीं के विकास के लिए इन्हीं गुणों की आराधना के लिए आराम शास्त्रों में बहुत से अनुष्ठान बतलाये गये हैं। उसमें से प्रतिदिन जिन मंदिर में जाकर के जिन प्रतिमा का दर्शन, वंदन, एवं पूजन करना वह दर्शन विशुद्धि का महान आलंबन है। ज्योति से ज्योति प्रगट होती है वैसे ही परमात्मा के जिन प्रतिमा के दर्शन से आल स्वरूप की पहचान होती है। उन्होंने बताया कि जिन प्रतिमा के दर्शन-पूजन के समय हुए हैं. आपने उन आवरणों को हटा कर शुद्ध स्वरूप प्रगट कर किया है, मैं भी उन आवरणों को हटा कर शुद्ध स्वरूपी बन जाऊं। दर्शन से ही आत्त्त स्वरूप अन्त में आत्म दर्शन होता है। भवी जीव- आला ऐसी भावना करता है कि हे परमात्मा। जैसा शुद्ध स्वरूप आपका है वैसा ही तत्त्व दृष्टि से मेरी आत्मा का भी है - मगर मेरी आत्मा आठ कर्मों के आवरण लगे। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र हिरण, तेजसिंह बोल्या, बसंत मारवाड़ी, राजेन्द्र जवेरिया, यशवंत जैन, निर्मल राजनगर वाला, देवेन्द्र पुंजावत सहित श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।