boltBREAKING NEWS
  •   दिन भर की वीडियो न्यूज़ देखने के लिए भीलवाड़ा हलचल यूट्यूब चैनल लाइक और सब्सक्राइब करें।
  •  भीलवाड़ा हलचल न्यूज़ पोर्टल डाउनलोड करें भीलवाड़ा हलचल न्यूज APP पर विज्ञापन के लिए सम्पर्क करे विजय गढवाल  6377364129 advt. [email protected] समाचार  प्रेम कुमार गढ़वाल  [email protected] व्हाट्सएप 7737741455 मेल [email protected]   8 लाख+ पाठक आज की हर खबर bhilwarahalchal.com  

राज्यों में उपमुख्यमंत्री बनाना संविधान का उल्लंघन नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

राज्यों में उपमुख्यमंत्री बनाना संविधान का उल्लंघन नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

 

नयी दिल्ली,   उच्चतम न्यायालय ने राज्यों में उप मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की परंपरा पर सवाल उठाने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने 'पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी' की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उप मुख्यमंत्री सिर्फ एक पदवी है, जो किसी भी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती है।

उपमुख्यमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, ‘‘सबसे पहले और सबसे जरूरी बात यह है कि एक उपमुख्यमंत्री राज्य सरकार में मंत्री होता है और इससे संविधान का उल्लंघन नहीं होता।’’ याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य उपमुख्यमंत्री नियुक्त करके गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि ऐसी नियुक्तियां किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करतीं। 

पीठ ने कहा कि उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति कुछ राज्यों में पार्टी या सत्ता में पार्टियों के गठबंधन में वरिष्ठ नेताओं को थोड़ा अधिक महत्व देने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रथा है... यह असंवैधानिक नहीं है। दिल्ली स्थित ‘पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी’ द्वारा दायर इस याचिका को खारिज करते हुए, इसमें कहा गया कि संविधान के तहत डिप्टी सीएम, आखिरकार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं।

याचिका में क्या कहा गया था?

वहीं दूसरी तरफ याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी ओर से तर्क दिया कि राज्य डिप्टी सीएम की नियुक्ति करके एक गलत उदाहरण स्थापित कर रहे हैं, जो उन्होंने कहा कि संविधान में कोई आधार होने के बिना ऐसा किया गया था। वकील ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई अधिकारी निर्धारित नहीं है, ऐसी नियुक्तियां मंत्रिपरिषद में समानता के नियम का भी उल्लंघन करती हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-  याचिका में कोई दम नहीं

इसपर लेकिन पीठ ने जवाब दिया, “एक उपमुख्यमंत्री, एक मंत्री ही होता है… उपमुख्यमंत्री किसी भी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है, खासकर इसलिए कि किसी को विधायक होना चाहिए। यहां तक कि अगर आप किसी को डिप्टी सीएम भी कहते हैं, तब भी यह एक मंत्री का संदर्भ है।" कोर्ट ने कहा कि उपमुख्यमंत्री का पदनाम उस संवैधानिक स्थिति का उलंघन नहीं करता है कि एक मुख्यमंत्री को विधानसभा के लिए चुना जाना चाहिए। लिहाजा इस याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।