अपने जीवन को सरल एवं सहज बनाना ही जीवन कौशल है - मीना राजपुत 

अपने जीवन को सरल एवं सहज बनाना ही जीवन कौशल है - मीना राजपुत 
X

राजसमन्द ( दिलीप सिंह) अनुकूली तथा सकारात्मक व्यवहार की वे योग्यताएँ हैं जो व्यक्तियों को दैनिक जीवन की माँगों और चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सक्षम बनाती हैं।ये जीवन कौशल सीखे जा सकते हैं तथा उनमें सुधार भी किया जा सकता है।  आग्रहिता , समय प्रबंधन , सात्विक चिंतन , संबंधों में सुधार, स्वयं की देखभाल के साथ-साथ ऐसी असहायक आदतों, जैसे - पूर्णतावादी होना, विलंबन या टालना इत्यादि से मुक्ति, कुछ ऐसे जीवन कौशल हैं, जिनसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

जीवन को सफल बनाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातें इस प्रकार से हैं-

1.तन मन को स्वस्थ बनाए रखना।

2.आलस मुक्त जीवन।

3.अच्छी अच्छी बातें सीखना।

4.स्व-कर्त्तव्य पालन करना।

5.नित नूतन ज्ञान एवं मनोभाव से कार्य करना।

आग्रहिता -

आग्रहिता एक ऐसा व्यवहार या कौशल है जो हमारी भावनाओं, आवश्यकताओं, इच्छाओं तथा विचारों के सुस्पष्ट तथा विश्वासपूर्ण संप्रेपषण में सहायक होता है। यह ऐसी योग्यता है जिसके द्वारा किसी के निवेदन को अस्वीकार करना, किसी विषय पर बिना आत्मचेतन के अपने मत को अभिव्यक्त करना , या फिर खुल कर ऐसे संगवेगो जैसै … प्रेम ' क्रोध इत्यादि को अभिव्यक्त करना संभव होता हैं। यदि आप आग्रही हैं तो आपमें उच्च आत्म-विश्वास एव्ं आत्म- सम्मान तथा अपनी अस्मिता की एक अटूट भावना होती है। जीवन कोशल मानव जीवन मे उपयोगी सिद्ध होता है।

 

समय प्रबंधन-

आप अपना समय जैसै व्यतीत करते हैं वह आपके जीवन की गुणवत्ता को निर्धारित करता है।। समय का प्रबंधन तथा प्रत्यायोजित करना सीखने से, दबाव-मुक्त होने मे सहायता मिल सकती है। समय दबाव कम करने का एक प्रमुख तरीका, समय के प्रत्यक्षण मे परिवर्तन लाना है। समय प्रबंधन का प्रमुख नियम यह है कि आप जिन कार्यों को महत्त्व देते हैं उनका परिपालन करने मे समय लगाएँ या उन कार्यों को करने मे जो आपके लक्ष्यप्राप्ति मे सहायक हों। आपको अपनी जानकारियों की वास्तविकताओं का पता हो, तथा कार्य को समय पर करें। यह सपष्ट होना चाहिए कि आप क्या करना चाहते है तथा आप अपने जीवन मे इन दोनो बातों मे सामंजस्य स्थापित कर सके, इन पर समय प्रबंधन निर्भर करता है।आप जो भी करने जा रहे हो उसकी एक समुचित रूपरेखा तैयार करिए।आप देखेंगे कि आपने जो अपने काम करने की रूपरेखा तैयार की है वह कितनी अधिक आपको मदद कर रही है।एक समय-सारणी बनाएँ और उस पर अमल करें।शिक्षा का वास्तविक रूप यह होना चाहिए कि हम देश के प्राकृतिक साधनों का समुचित प्रयोग करना जानें। वास्तविक शिक्षा वह है जिसके प्रयोग से हमारे देश की पैदावार में वृद्धि हो, व्यापार अधिक उन्नतिशील हो, शरीर अधिक क्रियाशील हो, मस्तिष्क की मौलिकता में अभिवृद्धि हो, हृदयशिक्षा का वास्तविक रूप यह होना चाहिए कि हम देश के प्राकृतिक साधनों का समुचित प्रयोग करना जानें। वास्तविक शिक्षा वह है जिसके प्रयोग से हमारे देश की पैदावार में वृद्धि हो, व्यापार अधिक उन्नतिशील हो, शरीर अधिक क्रियाशील हो, मस्तिष्क की मौलिकता में अभिवृद्धि हो, हृदय अधिक परिष्कृत हो एवं शुद्ध भावों का आगार बने, देश के उद्योग-धंधों में अनेकरूपता हो एवं राष्ट्र अधिक सुसंगठित एवं एकता संपन्न हो।

Next Story