देशप्रेम, संस्कार और सहकार के भाव का बीजारोपण करती है राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता

देशप्रेम, संस्कार और सहकार के भाव का बीजारोपण करती है राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता
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राजसमन्द (राव दिलीप सिंह) भारत विकास परिषद, शाखा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहर के विभिन्न विद्यालयो के प्रतिभागी विद्यार्थियों के माध्यम से शाखा स्तरीय राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ स्थित सभागार में किया गया। मुख्य अतिथी कांकरोली निवासी डॉ. आनंद श्रीवास्तव के साथ मंच पर भाविप जिलाध्यक्ष संजय सामसुखा, परिषद के वरिष्ठ सदस्य कमल किशोर व्यास, शाखा अध्यक्ष सुनील लखोटिया, परिषद् सचिव गौरव मूंदड़ा, प्रकल्प प्रभारी भगवती प्रसाद व्यास उपस्थित रहे। भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद की छवी के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन एवं वन्देमातरम गायन से राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता का प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में सुनील लखोटिया ने स्वागत उद्बोधन में परिषद् का परिचय देते हुए निरंतर चल रहे प्रकल्पों एवं विभिन्न सेवा कार्यों पर प्रकाश डाला।
प्रकल्प प्रमुख भगवती प्रसाद व्यास ने प्रतियोगिता परिचय देते हुवे बताया की इस राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में शहर के 6 विद्यालयों के 47 विद्यार्थियों और 11 वाद्य यन्त्र वादकों ने आकर्षक वेशभूषाओ और परंपरागत साज-बाज के साथ बड़े उत्साह से भाग ले रहे है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे जितेन्द्र लड्ढा ने प्रतियोगिता के नियमों से सभी प्रतियोगी टीमों एवं निर्णायकों को अवगत कराया।
तीन प्रमुख चरणों (हिन्दी, संस्कृत एवं लोकगीत) में आयोजित समूहगान प्रतियोगिता के प्रथम चरण के रूप में हिंदी भाषा के देशभक्ति गीतों - भारत का मान बढ़ाये हम, जननी जन्मभूमी स्वर्ग से महान है, जय जय है भगवती, चलों जवानों बढ़ो जवानों, भारत माँ की संताने हम, भारत वन्दे मातरम आदि अनेक गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां हुयी, जिसमे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया। द्वितीय चरण में संस्कृत भाषा के देशभक्ति गीतों जय जय है भगवती, देवी देहिनो बलं, जय भारत जननी आदि एवं अंतिम चरण में राजस्थानी लोकगीतों केसरिया बालम, इन लहरिये रा, खेलन द्यो गणगौर आदि गीतों की मनमोहक प्रस्तुतिया हुयी। शाखा अध्यक्ष सुनील लखोटिया ने बताया की प्रतियोगिता में निष्पक्ष मूल्याङ्कन हेतु तीन विविध विशेषज्ञ निर्णायकों मदन डिडवानिया, सीमा चपलोत एवं विद्या बाफना ने स्वर, ताल, उच्चारण, प्रस्तुतीकरण आदि विभिन्न आयामों के आधार पर प्रतिभागी दलों का पृथक पृथक मूल्याङ्कन किय। निर्णायक सीमा चपलोत ने कार्यक्रम के दौरान स्वरचित गीत के माध्यम से परिषद् के सेवा कार्यो की सराहना की। निर्णायक विद्या बाफना ने अपनी मधुर आवाज में राजस्थानी लोकगीत सुनाया। अंत में परिणामो की घोषणा करते हुवे प्रकल्प प्रमुख भगवती प्रसाद व्यास ने बताया की हिंदी समूहगान प्रतियोगिता में स्मार्ट स्टडी स्कूल के बच्चों द्वारा विभिन्न भारतीय वेशभूषाओ के साथ जय जय है। भगवती गीत पर दी गयी प्रस्तुति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। गायत्री विद्या मंदिर के छात्रो दारा दी गयी प्रस्तुति भारत मान का मान बढाए तथा लक्ष्मीपत सिंघानिया स्कुल के छात्रो दारा दी गयी प्रस्तुति चलो जवानों, बढ़ो जवानों ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार संस्कृत समूहगान प्रतियोगिता में भी स्मार्ट स्टडी स्कूल के बच्चों द्वारा जय जय है भगवती गीत पर दी गयी प्रस्तुति ने प्रथम और आलोक विद्यालय के छात्रो द्वारा देवी देहिनो बलं गीत की प्रस्तुति ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। लोकगीत प्रतियोगिता में स्मार्ट स्टडी स्कूल प्रथम व क्रिएटिव ब्रेन एकेडेमी स्कूल द्वितीय स्थान पर रहे। प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर विजेता रहे सभी दलों एवं दल के प्रत्येक प्रतिभागी को परिषद् की और से पुरस्कार स्वरुप विजेता स्मृति चिन्ह (ट्रॉफी) भेंट किये गये । प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र दिए गये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुवे कहा की यह समूहगान प्रतियोगिता के विविध चरण क्रमश: देशप्रेम, संस्कृति और सहकार के भाव का बीजारोपण करती है। 
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सोनी एवं जितेन्द्र लड्ढा ने किया। अंत में शाखा सचिव गौरव मूंदड़ा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुवे बताया की इस प्रतियोगिता में विजेता रही टीम को प्रांतीय स्तर आयोजित प्रतियोगिता में प्रस्तुति का अवसर मिलेगा, जहाँ पर विजेता रहने वाली टीम राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच सकेगी।

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