साइबर क्रिमिनल्स के निशाने पर 40 से ज्यादा उम्र के लोग, बदनामी के डर से सिर्फ 3% मामलों में FIR

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही सेक्सटॉर्शन गिरोह के दो मास्टरमाइंड को राजस्थान के मेवात क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरोह दिल्ली-एनसीआर समेत पड़ोसी राज्यों के 200 से अधिक लोगों को ब्लैकमेल कर उनसे लाखों रुपये वसूल चुका है। गिरोह के सदस्य विभिन्न सोशल एप पर सुंदर लड़कियों की तस्वीरों के साथ फर्जी प्रोफाइल तैयार कर सोशल प्लेटफॉर्म पर लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने व दोस्त बनने के बाद वे उनसे वाट्सएप नंबर साझा करते हैं और अश्लील चैटिंग (सेक्सटिंग) शुरू कर देते हैं।
उसके बाद गिरोह के सदस्य वीडियो कॉल की पेशकश करते हैं। वीडियो कॉल करने पर लड़कियां कपड़े उतारती दिखती हैं और पीड़ितों को भी कपड़े उतारने के लिए आमंत्रित करती हैं। इस तरह हनी ट्रैप में फंसाने के बाद गिरोह के सदस्य लोगों की नग्न तस्वीरें स्क्रीन रिकॉर्डिंग एप के जरिए रिकॉर्ड कर लेते हैं। एक बार नग्न तस्वीरें रिकार्ड करने के बाद गिरोह के सदस्य ब्लैकमेल कर पैसे की मांग शुरू कर देते हैं।पिछले कुछ समय में साइबर फ्रॉड के कुछ खास मामले सामने आए हैं जिनमें लोग इस तरह सेक्सटॉर्शन का शिकार हुए। 2019 में देश में लगभग 1800 मामले साइबर फिरौती के सामने आए थे। इसमें सेक्सटॉर्शन के मामले भी शामिल थे। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक साइबर फिरौती के मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए थे।
हाल ही ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक स्टडी में पाया गया कि सेक्सटॉर्शन के शिकार लोगों में ज्यादातर कम उम्र के होते हैं। वहीं इस तरह के अपराध को अंजाम देने देने वाले क्रिमिनल्स में ज्यादातर पुरुष ही होते हैं। बदनामी के डर से अधिकतर मामलों में पीड़ित चुप रह जाते हैं।
ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की ओर से की गई स्टडी में 78 ऐसे केस का अध्ययन किया गया जो सेक्सटॉर्शन की परिभाषा के तहत आते थे। इन मामलों की सुनवाई अमेरिका के 29 राज्यों में हुई। 3 मामले विदेशी न्यायाधिकरण के थे। अध्ययन में पाया गया कि 'इंटरनेट की वजह से किसी को सेक्सुअली धमकाने या डराने के लिए जरूरी नहीं की धमकाने वाला उसी देश में रहता हो।'
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार कहते हैं कि सेक्सटॉर्शन के शिकार लोगों में ज्यादातर 40 से अधिक उम्र के होते हैं। इस तरह के अपराध को अंजाम देने वाले क्रिमिनल्स में ज्यादातर पुरुष ही होते हैं। वयस्क विक्टिम में महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है। इस तरह के हमलों के शिकार हुए लोग शर्म की वजह से चुपचाप रह जाते हैं।
कड़े कानून से मिलेगी सफलता
संजय कुमार कहते हैं कि इस पर लगाम लगाने के लिए अलग से एक कड़ा कानून बनना चाहिए, जिसमें सेक्शुअल अब्यूज, फिरौती, चाइल्ड पॉर्नोग्राफी वगैरह को शामिल किया जाए। किसी अश्लील विषय-वस्तु को ऑनलाइन भेजना, प्रकाशन या प्रसारण गैरकानूनी और दंडनीय है। ऐसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। संजय कहते हैं कि एक बार इस जाल में फंस जाने पर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सावधान और सतर्क रहना ही बेहतर है।
क्या है सेक्सटॉर्शन
साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के मुताबिक सेक्सटॉर्शन के रूप में पिछले एक साल से ब्लैकमेलिंग का ऑर्गनाइज्ड क्राइम चल रहा है। इसमें व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आता है। उस कॉल में दूसरी तरफ एक न्यूड लेडी होगी जो स्क्रीन रिकॉर्डर के जरिए आपके चेहरे के साथ एक वीडियो बना लेगी। बाद में वीडियो को इंटरनेट पर डालने की धमकी देकर आपसे पैसे मांगे जाते हैं। दरअसल, सेक्सटॉर्शन का मतलब हुआ किसी के कंप्यूटर में सेंध लगाकर अश्लील पिक्चर या वीडियो चुराना या फिर वेबकैम से ऐसा करना। फिर इस वीडियो या तस्वीर के जरिए ब्लैकमेल करना।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी दुबे कहते हैं कि यह एक खतरनाक अपराध है जिसमें कोई व्यक्ति आपकी निजी और संवेदनशील जानकारी को प्रकट करने की धमकी देता है। सेक्सटॉर्शन जबरन वसूली का एक भयानक और अमानवीय अपराध है। सेक्सटॉर्शन ऑनलाइन ब्लैकमेल के समान है जिसमें ब्लैकमेलर पीड़ित से कैमरे के सामने यौन गतिविधियों में भाग लेने की मांग करता है, या बड़ी राशि की मांगता है।
दिल्ली पुलिस को शिकायत
दिल्ली पुलिस को साल 2021 में सेक्सटॉर्शन की 409 और इस साल 31 अगस्त तक 1469 शिकायतें मिलीं, मगर उनमें से कुछ ही शिकायतें एफआईआर में तब्दील हो सकीं। पुलिस डाटा के मुताबिक, पिछले साल सेक्सटॉर्शन की 409 शिकायतों में केवल 24 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वहीं, इस साल कुल 1469 शिकायतों में से केवल 44 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई हैं।
ये कहती है रिपोर्ट
मैशेबल डॉट कॉम के मुताबिक पिछले कुछ सालों में 'सेक्सटॉर्शन' की घटनाएं दोगुनी से ज्यादा बढ़ी हैं।
सेक्सटॉर्शन ई-मेल सोर्स देशों में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। इसमें वियतनाम, ब्राजील और अर्जेंटीना टॉप 3 में हैं।
इसमें हनी ट्रैप की तरह लोगों को अपना शिकार बनाया जाता है। इस तरह के फ्रॉड में महिला और पुरुष दोनों शामिल हो सकते हैं। कभी-कभी आरोपी एक व्यक्ति न होकर पूरी गैंग हो सकती है। गैंग में हैकर्स भी होते हैं जो हैकिंग के जरिए ब्लैकमेलिंग करते हैं और अक्सर बड़े लोगों को फंसाते हैं।
इस तरह के मामलों के बच्चे भी शिकार होते हैं, क्योंकि वे घबराकर इन अपराधियों के जाल में फंसते चले जाते हैं। उन्हें डर होता है कि उनकी सच्चाई किसी के सामने आ गई तो वे उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। बदनामी और शर्म की वजह से लोग पुलिस में शिकायत नहीं करते और ठगों की मांग पूरी कर देते हैं। बहुत ही कम लोग हैं जो इस बारे में शिकायत करते हैं।
'सेक्सटॉर्शन' का नया उदाहरण
मोबाइल गेमिंग ऐप के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले आमिर खान की जांच के दौरान मिले तथ्यों से पुलिस को पता चला कि जगह-जगह अवैध कॉल सेंटर बना कर डेटिंग ऐप के जरिए वह सेक्सटॉर्शन का भी धंधा चला रहा था। आमिर ने डेटिंग ऐप और फर्जी कॉल सेंटर का जाल इस तरीके से फैला रखा था कि पुलिस भी हैरान है।
ऐसे होता था सेक्सटॉर्शन
आमिर ने कई इलाकों में फर्जी कॉल सेंटर खोल रखे थे। कोलकाता पुलिस के अनुसार बाहर से यह किसी कंपनी के लिए कॉल सेंटर होते थे पर भीतर इनसे डेटिंग एप के जरिए 'सेक्सटॉर्शन' का काम चलता था। दफ्तर में रिसेप्शन से लेकर मैनेजर तक हर स्तर पर एजेंट होते थे। सबसे पहले कॉल सेंटरों से फोन नंबर खरीदे जाते थे। उसके बाद उन्हीं नंबरों पर कॉल कर युवकों को डेटिंग एप की जानकारी दी जाती थी। जो भी डेटिंग के लिए दिलचस्पी दिखाता उन्हें कुछ लड़कियों की फर्जी फोटो भेजी जाती। सब कुछ व्हाट्सएप पर चलता।
इन कॉल सेंटरों में महिलाओं के नाम से फर्जी सोशल साइट अकाउंट होते थे। उसके बाद विभिन्न नंबरों पर पुरुषों को फोन किया जाता था। डेटिंग एप में दिलचस्पी दिखाने वाले युवकों से पहले ही एक मोटी रकम ली जाती थी। काम न होने पर पैसे लौटाने का पूरा आश्वासन दिया जाता था। उसके बाद किसी लड़की की फोटो भेजने के बाद कॉल सेंटर वाले और पैसे की डिमांड करते। उसके बाद उससे वीडियो कॉल पर मीटिंग तय की जाती। आगे तय समय पर वीडियो कॉल किया जाता तो अश्लील वीडियो भेजे जाते। फिर उसी वीडियो और स्क्रीन शॉट का इस्तेमाल कर ब्लैकमेलिंग का काम शुरू हो जाता। जो युवक उसमें फंस जाते उनसे लगातार पैसे लेने का सिलसिला चलता। उन्हें भेजे गए वीडियो का स्क्रीनशॉट ले लिया जाता और पैसों की मांग की जाती। उन्हें धमकी भी जाती कि स्क्रीनशॉट देकर वह पुलिस को बता देंगे और उन्हें बदनाम कर देंगे।
कोरोना के बाद धंधे की तरह बढ़ रहा सेक्सटार्शन, सख्त आईटी एक्ट बनाने की जरूरत- पवन दुग्गल
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट व साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने बताया कि कोरोना के बाद सेक्सटॉर्शन के केस कई गुना बढ़े हैं। यह इससे जुड़े गिरोह या अपराधियों के लिए एक धंधे की तरह हो गया है। आज भारतीय कानून में सेक्सटॉर्शन के केस में कोई भी सख्त कानून नहीं है, आईटी एक्ट में धारा 67 के तहत की मामला दर्ज किया जाता है, जिसमें अश्लील इलेक्ट्रानिक्स जानकारी को प्रदर्शित करना शामिल है, यह धारा जमानती है। इसका फायदा इसमें शामिल लोग आसानी से उठा लेते हैं। इसके अलावा भी पुलिस भी ऐसे मामलों में सेक्सटॉर्शन के तहत मामला दर्ज करने से बचती है। इतने मामले आने के बाद भी आज तक भारत में सेक्सटॉर्शन के केस में किसी को भी सजा नहीं हुई है। जबकि होना यह चाहिए ऐसी घटनाओं में पुलिस ब्लैकमेलिंग, प्रताड़ना के साथ अन्य गैर जमानती धाराएं इसमें लगाना शामिल करें। और ऐसे मामलों में जब तक सख्ती नहीं बरती जाएगी, ऐसे करने वालों में डर या अंकुश नहीं लगाया जा सकता है। आईटी एक्ट में बदलाव कर उसमें सेक्सटॉर्शन समेत कुछ अन्य मामलों में संशोधन कर गैर-जमानती बनाना होगा।
तीन तरह से होता है सेक्सटॉर्शन
शारीरिक संबंध के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है
दूसरा अधिक वीडियो मांगने के लिए इसका प्रयोग होता है
तीसरा पैसे की उगाही के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है
कानून क्या कहता है?
इस अपराध पर भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जबरन वसूली (धारा 383, 384, 385), मानहानि (धारा 499, 500), आपराधिक धमकी (धारा 503, 506, 507) के तहत मामला दर्ज किया जाता है।
ब्लैकमेलिंग के शिकार क्या करें?
नजदीकी पुलिस स्टेशन में तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। फेक आईडी, फोन नंबर के बारे में जानकारी साइबर सेल से शेयर करें। पूरे मामले को साफ-साफ पुलिस को बताएं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट अश्विनी दुबे कहते हैं कि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द शिकायत दर्ज करना आवश्यक है क्योंकि इससे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान हो जाता है।
पीड़ित को सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर क्राइम सेल में फॉर्मल रिपोर्ट दर्ज करनी होगी। यह किसी भी शहर में रजिस्टर किया जा सकता है, जहां आप उस समय मौजूद होते हैं, अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना।
इंटरनेट की दुनिया में बरतें सावधानी
साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने कहा कि लोगों में काफी कम जागरूकता है। इंटरनेट पर जाते समय काफी सतर्क रहना चाहिए। लोग इंटरनेट को हल्के में लेते हैं जबकि ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ये ऐसी दुनिया है जहां कौन व्यक्ति किस रूप में आपके सामने आ रहा वह पता नहीं चलता। सोशल मीडिया पर कनेक्ट करते समय ध्यान देना चाहिए। हो सकता है कोई रिक्वेस्ट आपके फ्रेंड के नाम से आया हो लेकिन वह साइबर फ्रॉड की तरफ से भी आ सकता है हो सकता है। कोई साइबर फ्रॉड आपकी दोस्त के नाम से प्रोफाइल बनाकर आपसे जुड़ने की कोशिश कर रहा हो और इसके बाद खेल शुरू होता है।
