न्यायाधिश को स्कूल में मिली अनियमितताएं सुधार के दिए निर्देश

राजसमंद। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार छात्र छात्राओं को विधिक रूप से जागरूक करने हेतु
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजसमन्द मनीष कुमार वैष्णव द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोगाणा का निरीक्षण एव विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
निरीक्षण में अव्यवस्था का अंबार दिखाई दिया। विद्यालय की सफाई व्यवस्था उचित नही पाई गई। विद्यालय में कक्षा कक्ष की दीवारों पर मकडिय़ो के झाले लगे हुए थे। विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नही थी। जिन बर्तनों मे बच्चो को भोजन दिया जाता है वे बर्तन गंदे खराब स्थिति में मिले। विद्यालय के शौचालय अत्यन्त
गंदी हालत में थे। कमरों की उचित साफ सफाई नही पाई गई। विद्यालय में स्टोर होने के बावजूद कक्षा कक्ष में टूटी फूटी व अन्य सामग्री पड़ी पाई। विद्यालय के विकास, व्यवस्था में सुधार के लिए उचित प्रयास नही करना पाया गया। विद्यालय में आपातकालिन सम्पर्क सूची नही पाई गई। न ही अग्नि से बचाव ह ेतु उचित व्यवस्था पाई गइ। इसके संबंध में सचिव वैष्णव द्वारा विद्यालय प्राचार्य कमलेश कुमार दरिया को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिये गये। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी को भी इस संबंध में अवगत कराने व पत्राचार करने के लिए कहा गया।
इस अवसर पर अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश मनीष कुमार वैष्णव द्वारा विधिक जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैष्णव ने उपस्थित बालक बालिकाओ को गुड टच बेड टच के बारें में जानकारी दी गई। इसके साथ ही उन्होने सफाई एव स्वच्छता रखने के प्रति भी जागरूक किया। नि:शुल्क विधिक सहायता के बारें में
जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, 18 वर्ष से कम उम्र के बालको, महिलाओं, प्राकृतिक आपदाग्रस्त व्यक्तियों और ऐसा व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय 3 लाख रूपये से कम है उसे न्यायालय में अपने प्रकरण की पैरवी करने हेतु नि:शुल्क अधिवक्ता दिया जाता है। बाल विवाह के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। अगर किसी को भी बाल विवाह होने की जानकारी प्राप्त होती है तो वह पुलिस, प्रशासन अथवा प्राधिकरण को इसकी सूचना दे।
इसके साथ ही उन्होंने बाल नशा मुक्ति, हरित न्याय अभियान, बच्चो के प्राप्त अधिकारों के संबंध में तथा महिलाओं के अधिकारों की जानकारियां भी प्रदान की।
