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पाप का घड़ा भरने पर आखिरी समय रोने के अलावा कोई विकल्प नहीं -समकितमुनि

पाप का घड़ा भरने पर आखिरी समय रोने के अलावा कोई विकल्प नहीं -समकितमुनि

भीलवाड़ा। मनुष्य को मन, वचन व काया का उपयोग करना आ जाए तो जो जिदंगी मिली उसका उपयोग हो जाता है। ऐसा करना नहीं आने पर जो जिदंगी मिली उसका दुरूपयोग हो जाता है। शरीर, मन व धन का सही उपयोग करना नहीं आने पर मिला हुआ भी समस्या का कारण बन जाता है। रोता हुआ वहीं आगे जाता है जो मिले हुए का उपयोग कैसा करना ये नहीं समझ पाता है। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शांतिभवन में बुधवार को नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिंदगी की नाव में जितने छेद बढ़ेगे उतनी समस्याएं बढ़ेगी। इन छिद्रो को रोकने के लिए मन, वचन व काया का संवर करना है। सत्ता मिलने पर किसी को सता भी सकते है और सहयोग भी कर सकते है। कुर्सी अच्छे आदमी को भी खतरनाक बना देती है। मुनिश्री ने कहा कि जो जिंदगी भर पाप करते है उनको मौत नजदीक आने पर नींद नहीं आती और यमराज के रूप में अपने पाप नजर आते है। पाप करने वाले की आत्मा तो जानती है जिंदगी भर उसने क्या किया। उन्होंने पाप से दूर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि पाप का घड़ा एक न एक दिन तो फूटना तय है इसलिए पाप का घड़ा भरने से बचो। पाप का घड़ा भरने वालों के पास आखिरी समय रोने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं रहता। जिसके अंदर राग-द्धेष नहीं रहा वह हर आत्मा पूजनीय है। धर्मसभा के शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने प्रेरक गीत ‘दुनिया में देव अनेकों है अरिहन्त देव का क्या कहना’ पेश किया। धर्मसभा में प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य रहा। धर्मसभा का संचालन करते हुए शांतिभवन श्रीसंघ के सहमंत्री प्रकाशचन्द्र पीपाड़ा ने किया। 

आदमी के कर्म ही उसे तकलीफ देते है

पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि आगम के अनुसार कोई किसी को परेशान नहीं करता आदमी के कर्म ही उसे तकलीफ देते है। उसके कर्म सताते है और जो कार्य किए वह परेशान करते है। कर्मो के आने का रास्ता बंद कर दो तो समाधान मिलते चले जाएंगे और ऐसा नहीं करने पर कदम-कदम पर समस्याओं से टकराव होगा। कानों का संयम, बोलने का संयम भी रख लिया तो पाप आने के रास्ते बंद हो सकते है। मुनिश्री ने सुलसा की कथा सुनाते हुए कहा कि ये दुनिया चमत्कार को नमस्कार करती है लेकिन जो चमत्कार के लपेटे में नहीं आते वह सुलसा की तरह तीर्थंकर बनने का साम्थर्य रखते है। सुलसा भगवान महावीर की दीवानी थी। जो भगवान महावीर का दीवाना हो जाए वह किसी ओर का नहीं हो सकता। 

पूज्य सौभाग्यमुनि की द्वितीय पुण्यतिथि पर होंगे दो दिवसीय आयोजन

बदी चतुर्दशी के अवसर पर 24 सितम्बर को सुबह 9 बजे से शांतिभवन में पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में लोगस्स पाठ एवं मांगलिक का आयोजन होगा। श्रमण संघीय महामंत्री पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. की द्वितीय पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 25 सितम्बर को सामूहिक सामायिक आराधना एवं 27 सितम्बर को गुणानुवाद सभा का आयोजन होगा। इस अवसर पर सामूहिक सामायिक आराधना के तहत 1008 सामूहिक सामायिक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह 27 दिवसीय आगम आराधना का आगाज 29 सितम्बर को आगम बत्तीसी रैली के साथ होगा। आगम आराधना के तहत भगवान महावीर की वाणी उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन किया जाएगा। आयम्बिल ओली की आराधना 1 अक्टूबर से शुरू होगी। पिछले 51 वर्ष से एकान्तर आयंबिल तप की आराधना कर रहे पूज्य समुतिप्रकाशजी म.सा. के जन्मोत्सव के दो दिवसीय आयोजन के तहत एक अक्टूबर को सामूहिक आयंबिल तप की आराधना एवं 2 अक्टूबर को गुणानुवाद दिवस का आयोजन किया जाएगा। श्रमण संघीय युवाचार्य महेन्द्रऋषि म.सा. का जन्मोत्सव 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा।