VIDEO मालासेरी में भादवी छठ पर और होगा बड़ा आयोजन, राष्ट्रपति को देंगे न्यौता-महंत पोसवाल

भीलवाड़ा (हलचल) । मालासेरी डूंगरी पर आगामी भादवी छठ को और भी बड़ा आयोजन इसमें राष्ट्रपति को आमंत्रित किया जाएगा। यह बात मालासेरी डूंगरी के महंत हेमराज पोसवाल ने एक होटल में सोमवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को मालासेरी डूंगरी में भगवान देवनारायण के 1111वें प्राकट्य महोत्सव का जो आयोजन हुआ वह पूर्णत: धार्मिक था। उसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। एक प्रश्र के जवाब में उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से कभी भी कोई भी मांग नहीं किये जाने का रिवाज है और उसी के अनुरूप प्रधानमंत्री से कोई मांग नहीं रखी गई। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी देवभक्तों सहयोगियों का आभार व्यक्त किया जिनके प्रयास से आयोजन सफल रहा।
मैं कभी चुनाव नहीं लड़ूंगा, राजनीति से वास्ता नहीं- महंत पोसवाल
मालासेरी में हुए कार्यक्रम को राजनीति से नहीं जोड़ा जा सकता और न ही मैं कभी राजनीति में आऊंगा,यह
महंत पोसवाल ने कहते हुए कहा कि वह विधानसभा या लोकसभा का कोई चुनाव नहीं लडेंग़े और न ही भविष्य में राजनीति करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास ही उनकी प्राथमिकता है।
मोदी ने चलाया फावड़ा -
महंत पोसवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ सबसे अधिक समय बिताया था। उन्हीं पलों को साझा करते हुए पोसवाल ने बताया कि नीम का पेड़ लगाने के दौरान फावड़ा भी चलाया था।
पायलट को दिये पीले चावल, गहलोत नहीं मिले -
एक सवाल के जवाब में महंत पोसवाल और संयोजक मनसुख गुर्जर ने कहा कि इतने भव्य आयोजन के लिए हमने आमंत्रण पत्र नहीं छपवाये। पीले चावल बंटवाये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को न्यौता देने गये लेकिन वे नहीं मिले। सचिन पायलट को पीले चावल देकर आये थे।
धाभाई और पाटील को नहीं दिया न्यौता-
देव दरबार के इस बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा करने में गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पाटील और प्रदेशाध्यक्ष रामप्रसाद धाभाई को हमने न्यौता नहीं दिया और न ही मोदी के साथ मंच साझा करने का पता था। एसपीजी के अलावा किसी को पता नहीं था कि मंच पर कौन बैठेगा। इन दोनों का नाम पीएमओ से आया था। कार्यक्रम के आयोजन समिति के संयोजक मनसुख गुर्जर के बारे में जब पूछा कि ये भी मंच पर नहीं थे तो पोसवाल ने कहा कि हमने तो पहले मानस बना लिया कि मंच पर नहीं बैठेंगे लेकिन महंत के नाते मुझे बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि धाभाई आज तक तो वहां नहीं आये और न ही उनका यहां कोई सहयोग है। उनके नाम कैसे आये इनका मुझे कोई पता नहीं। हमने जो नाम भेजे थे वे क्षेत्रीय सांसद, विधायक व अन्य के नाम थे।
