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अहम है भक्तों को मिलने वाला मालासेरी का प्रसाद.

अहम है  भक्तों को मिलने वाला मालासेरी का प्रसाद.

 

भीलवाडा (विजय प्रहलाद तेली). भगवान देवनारायण की जन्म स्थली मालासेरी डूंगरी पर श्रद्धालु तो प्रसाद में मिठाई नहीं बल्कि स्वादिष्ट रोटी और कढ़ी परोसी जाती है। प्रसाद पूरी तरह निशुल्क होता है।

भगवान देवनारायण का प्रसिद्ध स्थान मालासेरी आसींद चर्चा में है. इस मंदिर से भी कुछ खास चीजें जुड़ी हुई है जिसमें अहम है यहां भक्तों को मिलने वाला प्रसाद. यह कोई मिठाई नहीं बल्कि एक विशेष प्रकार की गेंहू की चपाती(रोटी) है. अपने आकार वजन के कारण इस रोटी को भक्त भी आनंद के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. सालों से मंदिर इस परंपरा को निभा रहा है. जहां भगवान के भोग बाद सुबह 9 बजे से लेकर रात 11 बजे तक भक्तों को इसको प्रसाद के रूप में वितरण भी किया जाता है. देवनारायण जन्म स्थली पर आए देव भक्तों को प्रसाद के रूप में हमेशा चूल्हे पर बनी गेहूं की चपाती व गरम-गरम लाजवाब कढ़ी परोसी जाती है. यह चपाती सामान्य चपाती से बिल्कुल अलग है. देव भक्तों को प्रसाद के रूप में भोजन के समय भोजन शाला में परोसी जाने वाली चपाती 2 फीट चौड़ी गोलाकार, आधा इंच जाड़ी (मोटाई) व 4 किलोग्राम वजन की है जो सवाद में भी लाजवाब लगती है. भंडारे में हर भक्त को चुल्हे की भट्टी पर बनी गरम -गरम रोटी(चपाती) व कढ़ी परोसी जाती है. जहां भक्त भगवान देवनारायण को याद करके ही प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं.

भगवान देवनारायण की जन्म स्थली परिसर में स्थित भोजन शाला में चपाती बनाने से पहले मशीन के द्वारा आटा लगाया जाता है. यहा प्रतिदिन हजारों की संख्या में देव भक्त प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं. भोजन शाला में बनी एक बड़ी भट्टी पर एक बड़ा चद्दर नुमा लोहे का तवा रखा हुआ है. जिसमें रसोईया बड़ी चपाती बनाता रहता है.

भोजन शाला में निगरानी रखने वाले चुन्नीलाल ने कहा कि मैं भोजनशाला की निगरानी रखता हूं यहा पिछले 10 वर्ष से सुबह 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक भोजनशाला चालू रहती है. यहा बनी पहली चपाती का भगवान देवनारायण के भोग लगाने के बाद लोगों को खिलाया जाता है. भोजन शाला में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं. चपाती बनाने के लिए पहले मशीन से आटा लगाया जाता है. उसके बाद मिट्टी के चूल्हे पर रोटी बनाई जाती है.