BJP का प्रियांक के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन, मंत्री समर्थक बोले- हमने उनके लिए चाय...

By :  vijay
Update: 2025-01-04 10:45 GMT

कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पर ठेकेदार की आत्महत्या मामले में भाजपा लगातार दबाव बना रही है। अब विपक्षी पार्टी ने मंत्री प्रियांक खरगे के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे जनवरी में कलबुर्गी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास का घेराव करेंगे।

इन लोगों ने किया विरोध का नेतृत्व

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालावाड़ी नारायणस्वामी ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भगवा पार्टी के नेता बड़ी संख्या में हाथों में तख्तियां लिए जगत सर्किल पर जमा हुए और मंत्री के खिलाफ नारे लगाए।

पुलिसकर्मियों को किया तैनात

जब भाजपा ने खरगे के आवास की घेराबंदी करने की योजना बनाई, तो मंत्री ने अनोखे तरीके से उनका मुकाबला करने का फैसला किया। वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियात के तौर पर आवास के बाहर पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

Dसमर्थकों ने ली चुटकी

प्रियांक खरगे के एक समर्थक ने चुटकी लेते हुए कहा कि हमने भाजपा नेताओं के लिए नारियल, कॉफी, चाय, बोतलबंद पेयजल का ऑर्डर दिया है। वह विरोध-प्रदर्शन के बाद थक जाएंगे। तब कुछ खा पी सकेंगे। वहीं, विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि न तो वह और न ही सरकार विपक्ष की मांग और दबाव की रणनीति के आगे झुकेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के खिलाफ कई मामले हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत मामला भी शामिल है।

येदियुरप्पा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र और शिवमोगा के सांसद बी वाई राघवेंद्र के पिता हैं। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पर दबाव बढ़ाते हुए भाजपा ने ठेकेदार की आत्महत्या की सीबीआई जांच और खरगे के इस्तीफे की मांग दोहराई है।

सिविल ठेकेदार सचिन पंचाल ने 26 दिसंबर को की थी आत्महत्या

सिविल ठेकेदार सचिन पंचाल ने 26 दिसंबर को बीदर जिले में चलती ट्रेन के सामने लेटकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने प्रियांक खरगे के करीबी सहयोगी राजू कपानुर पर उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कपानुर को एक करोड़ रुपये देने के लिए जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं, जिन्होंने आरोपों को खारिज कर दिया। खरगे ने भी कहा कि मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है क्योंकि सुसाइड नोट में उनका नाम नहीं था। उन्होंने सच्चाई सामने लाने के लिए मामले की जांच की भी मांग की। भाजपा ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है।

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