सनसनीखेज खुलासा: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था के साथ खिलवाड़: श्मशान की राख और हड्डियों से बनाई जा रही अगरबत्ती
प्रतीकात्मक इमेज
भीलवाड़ा | देशभर में इन दिनों चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भक्तजन सुबह-शाम अपने घरों और मंदिरों में धूप-दीप जलाकर मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में शुद्धता और सात्विकता का विशेष महत्व होता है, लेकिन इसी पावन समय में एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने करोड़ों भक्तों की आस्था को झकझोर कर रख दिया है।
बिहार में जांच में बड़ा पर्दाफाश
एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र द्वारा बिहार में की गई विशेष पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन अगरबत्तियों का उपयोग हम पूजा-पाठ में कर रहे हैं, उनमें से कई श्मशान की राख और हड्डियों के चूरे से तैयार की जा रही हैं। पटना के बांस घाट और गयाजी जैसे प्रमुख श्मशान घाटों से निकलने वाली चिता की राख और अधजले कोयले को सिंडिकेट के जरिए इकट्ठा कर फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है।
श्मशान के कोयल के दलाल, तैयार होती अगरबत्ती
एजेंट बिट्टू और रामजीवन का कबूलनामा: हड्डियों का चूरा और सेंट का खेल
पड़ताल के दौरान श्मशान से कोयला सप्लाई करने वाले एजेंट बिट्टू ने स्वीकार किया कि चिता के जलने के बाद बचे हुए चूरे में इंसान की हड्डियों के अंश भी मिले होते हैं। इसे क्रशर मशीनों में इतना बारीक पीस दिया जाता है कि पहचानना नामुमकिन हो जाता है। वहीं, एजेंट रामजीवन ने खुलासा किया कि बिहार के गयाजी में घर-घर में श्मशान के कोयले से अगरबत्ती बनाने का काम हो रहा है। इन अगरबत्तियों में गुलाब और चंदन जैसे तेज परफ्यूम और केमिकल मिलाए जाते हैं ताकि हड्डियों की बदबू को पूरी तरह दबाया जा सके।
बिस्कुट निर्माण और 5 राज्यों में सप्लाई का जाल
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि केवल अगरबत्ती ही नहीं, बल्कि कुछ बिस्कुट बनाने वाली फैक्ट्रियों में भी इसी प्रकार के कोयले का उपयोग होने की संभावना है। बिहार से लेकर यूपी तक करीब 5 राज्यों में यह नेटवर्क फैला हुआ है, जो 1000 करोड़ रुपये से अधिक का काला कारोबार कर रहा है। नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर इस तरह का कृत्य सामने आने के बाद अब बाजार में मिलने वाली पूजन सामग्री की शुद्धता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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