मौत पर साथ चलने वाला डॉगसा खुद बना विदाई का केंद्र, गांव ने पूरे सम्मान से किया कुत्ते का अंतिम संस्कार

Update: 2026-01-06 15:25 GMT

 ब्यावर जिले  के पास स्थित राजियावास गांव में इंसान और जानवर के बीच भावनात्मक रिश्ते की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। गांव में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती थी, तो एक कुत्ता अपने आप मृतक के घर पहुंच जाता था। वह न केवल वहां मौजूद लोगों के बीच चुपचाप बैठा रहता था, बल्कि शवयात्रा के साथ श्मशान तक जाता और अंतिम संस्कार पूरा होने तक वहीं डटा रहता था। इसी कारण गांव वाले उसे स्नेह से डॉगसा कहकर बुलाते थे।



मंगलवार को जब इसी डॉगसा की मौत की खबर गांव में फैली, तो माहौल गमगीन हो गया। लोगों ने इसे केवल एक कुत्ते की मौत नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के बिछड़ने जैसा माना। ग्रामीणों ने आपसी सहमति से पूरे सम्मान के साथ उसकी शवयात्रा निकालने का फैसला किया। डीजे साउंड और रामधुनी के साथ डॉगसा की अंतिम यात्रा गांव की गलियों से निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इसके बाद पूरे विधि विधान से उसका अंतिम संस्कार किया गया।


गांव के प्रशासक ब्रजपाल रावत ने बताया कि डॉगसा की उम्र करीब साढ़े पांच साल थी। उसने अपने व्यवहार से पूरे गांव के दिल में खास जगह बना ली थी। मौत की सूचना मिलते ही ग्रामीण स्वतः एकत्र हो गए और सभी ने शोक व्यक्त किया। लोगों का कहना था कि डॉगसा ने जीवनभर जिस तरह हर दुख की घड़ी में साथ दिया, उसी तरह उसकी विदाई भी सम्मान के साथ होनी चाहिए।


ग्रामीणों ने यह भी तय किया है कि 15 जनवरी को डॉगसा के बारहवें का कार्यक्रम रखा जाएगा। गांव में पहली बार किसी कुत्ते के लिए इस तरह का आयोजन किया जा रहा है। राजियावास के लोग मानते हैं कि डॉगसा ने उन्हें संवेदना, साथ और करुणा का अर्थ सिखाया और इसी वजह से उसकी याद को सम्मान के साथ जीवित रखा जाएगा।

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