थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्यों है जरूरी, बिना बीमा गाड़ी चलाने पर कितना पड़ सकता है भारी नुकसान

अक्सर लोग बाइक या कार खरीदते समय इंश्योरेंस को केवल औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वाहन चलाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि आपकी आर्थिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। भारत में यह बीमा कानूनी रूप से अनिवार्य है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक इसे हल्के में लेते हुए सड़क पर निकल जाते हैं।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या होता है
सरल शब्दों में कहें तो अगर आपकी गाड़ी से किसी राहगीर को चोट लग जाए, किसी की मौत हो जाए या किसी दूसरे वाहन अथवा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचे, तो उसका मुआवजा आपके थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से दिया जाता है। यह बीमा आपकी बजाय सामने वाले व्यक्ति और संपत्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया है और हादसे के समय आपको कानूनी परेशानियों से बचाने में मदद करता है।
इस बीमा में क्या कवर मिलता है
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के तहत मुख्य रूप से तीन बातें शामिल होती हैं। पहली किसी व्यक्ति को लगी चोट या मृत्यु पर मिलने वाला मुआवजा। दूसरी दूसरे वाहन को हुआ नुकसान। तीसरी सड़क पर लगी सरकारी संपत्ति जैसे पोल, डिवाइडर या सिग्नल को हुई क्षति। दुर्घटना के वक्त यही बीमा आपके लिए कानूनी ढाल का काम करता है।
किन चीजों का कवर नहीं मिलता
यह समझना बेहद जरूरी है कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस आपकी अपनी गाड़ी को सुरक्षित नहीं करता। आपकी बाइक या कार को हुआ नुकसान, चोरी या आग से हुई क्षति और आपकी खुद की मेडिकल ट्रीटमेंट लागत इसके दायरे में नहीं आती। इन सबके लिए अलग से कॉम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है।
बिना इंश्योरेंस पकड़े जाने पर क्या सजा हो सकती है
अगर ट्रैफिक पुलिस जांच के दौरान आपके पास वैध इंश्योरेंस नहीं मिलता तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। पहली बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये तक का चालान हो सकता है। बार बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़ सकता है और कुछ मामलों में जेल या ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड होने का खतरा भी रहता है। यदि इसी दौरान कोई दुर्घटना हो जाए तो पीड़ित को लाखों रुपये का मुआवजा आपको अपनी जेब से देना पड़ सकता है।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का खर्च कितना होता है
सरकार हर साल इसके प्रीमियम की दरें तय करती है और आमतौर पर यह ज्यादा महंगा नहीं होता। बाइक के लिए इंजन क्षमता के अनुसार यह करीब पांच सौ अड़तीस रुपये से दो हजार आठ सौ चार रुपये तक हो सकता है। कार के लिए यह लगभग दो हजार चौानबे रुपये से सात हजार आठ सौ सत्तानबे रुपये तक जाता है। लॉन्ग टर्म पॉलिसी लेने पर हर साल रिन्यू कराने की झंझट भी खत्म हो जाती है और प्रीमियम की राशि भी तय रहती है।
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