भीलवाड़ा: बारिश में बढ़े सर्पदंश के मामले, एक छात्र की मौत – डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

भीलवाड़ा हलचल। जिले में मानसून के दौरान सर्पदंश की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। हाल ही में एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली ९ वि क्षा की छात्रा रेशमा की सांप काटने से मौत हो गई। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण यह दुखद हादसा हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां सांप काटने के बाद समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के बाद हर मिनट कीमती होता है। यदि समय पर एंटीवेनम इंजेक्शन नहीं मिले तो मरीज की जान जाना तय है।
हर दिन आ रहे सर्पदंश के मरीज
जिला अस्पताल में रोजाना 1 से 2 सर्पदंश पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि कई मरीज निजी अस्पतालों में भी इलाज करवा रहे हैं। सिद्धि विनायक हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दुष्यंत शर्मा के अनुसार, जहरीले सांपों के काटने पर मरीज में लकवा जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। खासतौर पर करेत जैसे सांप न्यूरोटॉक्सिक होते हैं, जिनका जहर 6-7 घंटे में शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
इलाज में देरी पड़ सकती है भारी
कई ग्रामीण झाड़-फूंक या तांत्रिक उपायों के चक्कर में पड़कर कीमती समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर उचित चिकित्सा मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।
जिला अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गोड के अनुसार, जिला अस्पताल में एंटीवेनम इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। कई मामलों में एक मरीज को 10 तक इंजेक्शन दिए जाते हैं, इसके लिए अस्पताल पूरी तरह तैयार है।
अगर सांप काट ले तो क्या करें?
मरीज को शांत रखें और हिलने-डुलने से रोकें।
सांप की पहचान करने की कोशिश करें (रंग, आकार आदि)।
घाव को न काटें और न ही चूसें।
घरेलू उपाय, बर्फ या शराब का उपयोग न करें।
किसी झाड़-फूंक या ओझा के पास न जाएं।
तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा को बुलाएं या नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
निष्कर्ष:
जिले में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लोगों को जागरूक रहना बेहद जरूरी है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़-फूंक की जगह मेडिकल सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि अनमोल जानों को बचाया जा सके।
