आवारा कुत्ते ने काटा तो अब राज्य सरकार देगी भारी मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

भीलवाड़ा | शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी आवारा कुत्ते के काटने से किसी बच्चे, बुजुर्ग या आम नागरिक की मौत होती है या वह घायल होता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार जिम्मेदार होगी और उसे भारी मुआवजा देना होगा।
जस्टिस विक्रम नाथ की तल्ख टिप्पणी: "कुत्तों से इतना प्यार है तो घर ले जाएं"
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाते हैं। कोर्ट ने कहा: "जो लोग खुद को 'डॉग फीडर' कहते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको जानवरों से इतनी ही हमदर्दी है, तो उन्हें अपने घर ले जाइए और पालतू बनाकर रखिए। उन्हें सड़कों पर आवारा घूमने, लोगों को डराने और काटने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता।"
नगर निगम और प्रशासन की बढ़ेगी मुश्किलें
भीलवाड़ा सहित प्रदेश के सभी नगर निकायों के लिए यह आदेश एक बड़ी चुनौती है। कोर्ट ने माना कि पिछले 75 सालों में प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने में विफल रहा है।
* मुआवजे का प्रावधान: अब हर 'डॉग बाइट' केस में पीड़ित परिवार भारी हर्जाने का हकदार होगा, जिसे सरकार को भुगतना पड़ेगा।
* संस्थानों से हटाए जाएंगे कुत्ते: कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया है कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखा जाए।
आम जनता के लिए क्या बदलेगा?
* सुरक्षा का अधिकार: अब नागरिक कुत्ते के हमले की स्थिति में कानूनी रूप से मुआवजे की मांग कर सकेंगे।
* सख्त निगरानी: नगर परिषद को अब नसबंदी और टीकाकरण (ABC Rules) के साथ-साथ कुत्तों के हिंसक व्यवहार पर भी नजर रखनी होगी।
* फीडिंग ज़ोन: आवारा कुत्तों को कहीं भी खाना खिलाने के बजाय अब केवल निर्धारित 'फीडिंग पॉइंट्स' पर ही भोजन दिया जा सकेगा।
अपील: अपने क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या होने पर तुरंत नगर निगम को सूचित करें और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
