पेयजल में सीवेज का संकट: एनजीटी सख्त, राजस्थान सहित तीन राज्यों से मांगा जवाब

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पीने के पानी में सीवेज मिलने की गंभीर समस्या पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने इसे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है।
मीडिया रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
अधिकरण ने उन मीडिया रिपोर्टों पर गौर किया जिनमें स्पष्ट दिख रहा है कि पेयजल की पाइपलाइनें खुले नालों और गंदी सीवर लाइनों के बीच से होकर गुजर रही हैं। रिसाव के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है।
* ग्रेटर नोएडा: डेल्टा-1 सेक्टर में दूषित पानी पीने से बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ गए, जिनमें उल्टी और दस्त के लक्षण पाए गए।
* भोपाल: जांच के दौरान पानी के नमूनों में खतरनाक ई-कोलाई (E-coli) बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है।
* राजस्थान: प्रदेश के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और बोरा जैसे प्रमुख शहरों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
कानून का उल्लंघन और एनजीटी की कार्रवाई
एनजीटी की न्यायपीठ ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल पाना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इस लापरवाही को पर्यावरण संरक्षण कानून और जल प्रदूषण नियंत्रण कानून का खुला उल्लंघन माना गया है।
अधिकरण ने इन पक्षों को जारी किया नोटिस:
* राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार।
* तीनों राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
* केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)।
* केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय।
एनजीटी ने कहा है कि इस मामले में जवाबदेही तय की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। मामले की अगली सुनवाई में इन सरकारों को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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