फेसबुक पर दोस्ती कर करोड़ों की ब्लैकमेलिंग,: एयरहोस्टेस बनकर कारोबारी को फंसाया, परिवार समेत साजिश का आरोप

गुरुग्राम। शहर की एक पॉश सोसाइटी से सामने आया यह मामला सोशल मीडिया पर बनने वाली दोस्तियों के खतरनाक पहलू को उजागर करता है। फेसबुक पर खुद को एयरहोस्टेस बताने वाली महिला ने एक कारोबारी से पहले दोस्ती की, फिर भरोसा जीतकर उसे अपने जाल में फंसाया और सालों तक ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये वसूल लिए। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस साजिश में महिला अकेली नहीं थी, बल्कि उसके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल थे।

पीड़ित कारोबारी सेक्टर 54 की पॉश सोसाइटी में रहते हैं। वर्ष 2020 में उन्हें फेसबुक पर एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। बातचीत शुरू हुई तो महिला ने अपना नाम किम उर्फ प्रियंका संगमा बताया और खुद को दुबई की एमिरेट्स एयरलाइंस में एयरहोस्टेस होने का दावा किया। भरोसा दिलाने के लिए उसने फ्लाइट के अंदर की तस्वीरें भी भेजीं। धीरे धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फिर संपर्क व्हाट्सऐप तक पहुंच गया।

कुछ समय बाद महिला ने कारोबारी से निजी तस्वीरें मंगवाईं और फिर उन्हीं तस्वीरों के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि अगले पांच वर्षों तक यह सिलसिला चलता रहा और इस दौरान महिला और उसके साथियों ने कारोबारी से करीब छह करोड़ तीस लाख रुपये वसूल लिए।

मानसिक प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि कारोबारी पूरी तरह टूट गए। लगातार धमकियों और डर के कारण उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया और वे पैरालिसिस के शिकार हो गए। इसके बावजूद आरोपियों ने उन पर रहम नहीं दिखाया। अस्पताल खर्च के नाम पर फर्जी बिल भेजकर फिर से पैसे मांगे जाते रहे। कारोबारी ने डर और बदनामी से बचने के लिए दो मई 2021 को पहली बार पांच हजार रुपये ट्रांसफर किए थे, लेकिन इसके बाद मांगें लगातार बढ़ती चली गईं और रकम करोड़ों तक पहुंच गई।

जब पीड़ित ने आरोपियों के नंबर ब्लॉक किए तो भी पीछा नहीं छूटा। करीब एक सप्ताह बाद दूसरे नंबर से फिर तस्वीरें और चैट भेजकर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी गई। आरोपियों ने कारोबारी के ऑफिस, परिवार और कारोबार से जुड़ी जानकारियां पहले ही जुटा ली थीं। पैसे न देने पर ऑफिस में फोटो चस्पा करने, फेसबुक पर पोस्ट डालने और समाज में बदनाम करने की धमकियां दी जाती रहीं।

परेशान होकर आखिरकार कारोबारी ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। साइबर सेल को भी जांच में लगाया गया है ताकि लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों का पूरा नेटवर्क खंगाला जा सके।

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