पंचायत और नगर निकाय चुनावों में झूठे शपथपत्र पर सख्ती, प्रत्याशियों पर होगी आपराधिक कार्रवाई

जयपुर। पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनावों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है। जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़ सहित पूरे प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत और नगर पालिका चुनावों में यदि कोई प्रत्याशी नाम निर्देशन पत्र के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र या शपथपत्र में गलत अथवा भ्रामक जानकारी देता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
आयोग के निर्देशों के अनुसार पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य सहित सभी पदों के प्रत्याशियों को अपनी संपत्ति, लंबित आपराधिक मामलों, शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक जानकारियां शपथपत्र के रूप में देना अनिवार्य होगा। इन जानकारियों का उद्देश्य मतदाताओं को प्रत्याशी की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना बताया गया है।
पिछले चुनावों से सबक लेते हुए आयोग ने माना है कि पूर्व में कई प्रत्याशियों ने जानबूझकर तथ्य छिपाए या गलत विवरण प्रस्तुत किया था। विशेष रूप से संतान और शिक्षा से जुड़ी गलत जानकारियों के कारण कई सरपंचों को बाद में कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव के आधार पर इस बार पहले से ही स्पष्ट और सख्त दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के अनुसार किसी भी अभ्यर्थी की अयोग्यता की जांच चुनाव से पहले राज्य सरकार नहीं कर सकती। ऐसे विवाद केवल चुनाव याचिका के माध्यम से जिला न्यायालय द्वारा तय किए जाएंगे और निर्णय चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही होगा। नामांकन के समय प्रशासन केवल औपचारिक प्रक्रिया निभाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्रत्याशी जानबूझकर झूठा शपथपत्र देता है या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छुपाता है तो यह आपराधिक कृत्य माना जाएगा। ऐसे मामलों में रिटर्निंग अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया जाएगा।
निर्देशों के तहत शपथपत्रों की प्रारंभिक जांच रिटर्निंग अधिकारी करेंगे। यदि प्रथम दृष्टया कोई गड़बड़ी सामने आती है तो इसकी रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लंबित आपराधिक मामलों या संपत्ति से संबंधित गलत विवरण देना भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध होगा, जिसमें झूठे साक्ष्य और मिथ्या घोषणा पर सजा का प्रावधान है।
आयोग ने पुराने भ्रमित करने वाले आदेशों को निरस्त करते हुए कहा है कि नए निर्देशों से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
