सैंपल से छेड़छाड़ पर अदालत सख्त,: डीएनए गड़बड़ी के बीच आरोपित बरी; एसपी को गहन जांच के आदेश

भीलवाड़ा प्रेमकुमार गढ़वाल . पोक्सो न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपित को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, लेकिन फैसले में डीएनए सैंपलिंग और एफएसएल रिपोर्ट में गंभीर विसंगतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि सैंपल से छेड़छाड़ करने वालों की अब खैर नहीं। विशिष्ट न्यायाधीश पोक्सो एक बालकृष्ण मिश्र ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में अप्रत्याशित हस्तक्षेप करार देते हुए जिला पुलिस अधीक्षक को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीरसिंह कानावत के अनुसार, मामले में पीड़िता, उसके माता-पिता और भ्रूण के सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए थे। एफएसएल रिपोर्ट में तीनों के डीएनए का आपस में मेल नहीं होना दर्शाया गया, जो वैज्ञानिक रूप से असंभव स्थिति है। अदालत ने विशेषज्ञ को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा। विशेषज्ञ ने न्यायालय में कहा कि यह संभव नहीं कि पीड़िता के भ्रूण का डीएनए उसकी माता से मेल न खाए या माता-पिता का डीएनए पीड़िता से मेल न करे। उन्होंने संकेत दिया कि यह परिणाम गलत सैंपलिंग या सैंपल बदलने के कारण हो सकता है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे कृत्य वैश्विक वैज्ञानिक मानकों और न्यायिक प्रक्रिया की बुनियाद को छिन्न-भिन्न करते हैं तथा न्याय व्यवस्था को चुनौती देते हैं। आदेश में कहा गया कि यदि इस प्रकार की कारगुजारियों पर सख्ती नहीं बरती गई तो आमजन का न्यायिक प्रक्रिया से विश्वास उठ सकता है और सामाजिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने जिला पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि सैंपल के साथ कथित छेड़छाड़ किस स्तर पर और किसके द्वारा की गई, इसकी गहन और निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
