एंटी-वैलेंटाइन डे:: दिखावे के 'प्यार' से दूर खुद को तलाशने की जरूरत, रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट के बीच एक नई राह

दिखावे के प्यार से दूर खुद को तलाशने की जरूरत, रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट के बीच एक नई राह
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​भीलवाड़ा। आज के दौर में जहाँ प्यार और रिश्तों की परिभाषा सोशल मीडिया के दिखावे तक सिमट कर रह गई है, वहीं 'एंटी-वैलेंटाइन डे' महज एक विरोध नहीं बल्कि आत्म-चिंतन का जरिया बनता जा रहा है। वर्तमान हालातों में जिस तरह युवा पीढ़ी भटक रही है और वैवाहिक जीवन की मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं, ऐसे में 'सेल्फ लव' यानी खुद से प्यार करना और नैतिक मूल्यों को समझना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

​भटकती युवा पीढ़ी और रील लाइफ का भ्रम

​आज की युवा पीढ़ी अक्सर वास्तविक प्यार और आकर्षण के बीच का अंतर भूलती जा रही है। पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में युवा वर्ग वेलेंटाइन जैसे आयोजनों को केवल दिखावे और अस्थायी आकर्षण का माध्यम बना चुका है। रिश्तों में गंभीरता की कमी और 'फास्ट फूड' की तरह बदलते पार्टनर की वजह से युवाओं में मानसिक तनाव, अकेलापन और भटकाव बढ़ रहा है। एंटी-वेलेंटाइन डे हमें सिखाता है कि किसी के पीछे भागने के बजाय अपनी शख्सियत को निखारना और अपने चरित्र को मजबूत बनाना अधिक आवश्यक है।





टूटते परिवार और बढ़ते अपराध: एक गंभीर चेतावनी

​समाज के लिए सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्यार की आड़ में अब वैवाहिक जीवन भी असुरक्षित हो गया है। आज अखबारों की सुर्खियां अवैध संबंधों और उनके कारण होने वाले खूनी संघर्षों से भरी रहती हैं।


​गैर-संबंधों का जहर: विवाहेतर संबंधों (Extra-marital affairs) के कारण हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं।

​अपराध की चरम सीमा: हैरानी और दुख की बात है कि जिन रिश्तों में विश्वास होना चाहिए, वहां अब बेवफाई के चलते पतियों की हत्याएं जैसी खौफनाक वारदातें आम होती जा रही हैं।

​संस्कारों का अभाव: रिश्तों में आई यह गिरावट दर्शाती है कि समाज में धैर्य और नैतिकता खत्म हो रही है।

​निष्कर्ष: दिखावे से बचें, मर्यादा को समझें

​एंटी-वेलेंटाइन डे का असली उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम खुद को पहचानें और रिश्तों की मर्यादा को समझें। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यह जरूरी है कि वे 'सिंगल होने के बोझ' या 'रिश्तों की मजबूरी' में गलत राह न चुनें। दोस्ती और खुद के प्रति सम्मान को प्राथमिकता देकर ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है, जहाँ रिश्तों में हत्या या धोखे की जगह प्रेम और विश्वास हो।

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