बाजार के 'ज़हरीले' रंगों को कहें ना, घर पर इन आसान तरीकों से तैयार करें सुरक्षित और हर्बल गुलाल

भीलवाड़ा हलचल। होली के उल्लास में मिलावटी और केमिकल युक्त रंगों का डर अब बीते दौर की बात होने वाली है। भीलवाड़ा हलचल अपने पाठकों की सेहत के प्रति जागरूक रहते हुए कुछ ऐसे घरेलू और कारगर तरीके साझा कर रहा है, जिससे आप बिना किसी डर के अपनों के साथ सुरक्षित होली खेल सकते हैं। रसोई में मौजूद साधारण चीजों से आप बेहतरीन हर्बल गुलाल और पक्के प्राकृतिक रंग तैयार कर सकते हैं।
किचन की सामग्री से तैयार करें शानदार गुलाल
बाजार में बिकने वाले 'पिसे पत्थर' वाले गुलाल के बजाय आप घर पर शुद्ध गुलाल बना सकते हैं। इसके लिए मैदा, आटा, बेसन या साधारण टेलकम पाउडर का आधार (Base) लें।
पीला गुलाल: एक कप हल्दी को बेसन या मैदा में मिलाकर बेहतरीन पीला गुलाल तैयार किया जा सकता है। यह त्वचा के लिए उबटन का काम भी करेगा।
हरा गुलाल: सूखी मेहंदी पाउडर में मैदा या बेसन मिलाकर आप सुरक्षित हरा गुलाल बना सकते हैं।
तरल रंगों के लिए अपनाएं ये प्राकृतिक नुस्खे
यदि आप पानी वाली होली के शौकीन हैं, तो इन प्राकृतिक विकल्पों का उपयोग करें:
गुलाबी/लाल रंग: चुकंदर को टुकड़ों में काटकर रातभर पानी में भिगोकर छोड़ दें। सुबह तक गहरा और सुंदर गुलाबी रंग तैयार हो जाएगा।
नारंगी रंग: सेमल के फूलों को पानी में डालकर रखने से सुबह तक केसरिया-नारंगी रंग बनकर तैयार हो जाता है।
मैजिक लाल रंग: हल्दी में थोड़ा सा खाने वाला चूना मिला देने से वह तुरंत गहरा लाल रंग पकड़ लेता है, जो पूरी तरह सुरक्षित है।
प्राकृतिक रंगों के फायदे ही फायदे
इन घरेलू रंगों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये आंखों की रोशनी को नुकसान नहीं पहुंचाते और न ही फेफड़ों में जाकर कोई संक्रमण फैलाते हैं। बल्कि हल्दी और बेसन जैसे तत्व त्वचा की सफाई कर उसे निखारते हैं। इस बार संकल्प लें कि मिलावटी रंगों का बहिष्कार करेंगे और परंपरा को प्राकृतिक तरीके से निभाएंगे।
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