बड़ा खुलासा: अजमेर में परिवहन विभाग की नाक के नीचे चल रहा था 'बगैर बॉडी' वाहनों का खेल, नियम-कानून ताक पर!

अजमेर/चित्तौड़गढ़ | एक तरफ जहां सरकार वाहन स्वामियों की छोटी सी लापरवाही और अवैध बॉडी निर्माण पर नोटिस और कार्रवाई का डंडा चला रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के अपने ही अधिकारी बिना बॉडी निर्माण के ही धड़ल्ले से वाहनों का रजिस्ट्रेशन कर कानून की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं! जी हां, ऐसा ही एक बड़ा और गंभीर मामला अजमेर के पास मांगलियावास के लामाना में उजागर हुआ है, जिसने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवहन विभाग का 'अवैध' खेल, सिर्फ चैसिस पर ही कर दिया रजिस्ट्रेशन!
सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग की टीमों ने मांगलियावास के निकटवर्ती लामाना में स्थित 'वाहन बॉडी निर्माता एसबी ग्रुप इंजीनियरिंग' पर आकस्मिक छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान परिसर में बॉडी निर्माण के लिए पहुंचे 13 भारी वाहन (भार वाहन) खड़े मिले। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 13 वाहनों में से 4 वाहन सिर्फ चैसिस की हालत में थे, यानी कि उन पर बॉडी निर्माण का कोई नामो-निशां ही नहीं था! बाकी के 9 वाहनों की बॉडी निर्माणाधीन पाई गई। सबसे गंभीर पहलू यह है कि ये सभी वाहन दौसा और चित्तौड़गढ़ जिले से रजिस्टर्ड पाए गए, जबकि बगैर बॉडी के वाहनों का रजिस्ट्रेशन करना कानूनन अपराध है।
महकमे के अफसरों की 'गंभीर' लापरवाही या मिलीभगत?
इस मामले ने परिवहन विभाग के अफसरों की गंभीर लापरवाही या फिर कहें कि मिलीभगत की ओर इशारा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जब भारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन से पहले बॉडी निर्माण अनिवार्य है, तो इन चैसिस वाले वाहनों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कैसे हो गया? नियमों के अनुसार, बॉडी निर्माण के बाद परिवहन निरीक्षक द्वारा वाहन का भौतिक सत्यापन किया जाता है और प्रोटोटाइप के अनुरूप बॉडी होने पर ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। फिर कैसे, बिना बॉडी के इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो गया?
परिवहन विभाग ने सिर्फ चैसिस वाले वाहनों को किया सीज, जांच रिपोर्ट भेजी परिवहन आयुक्त को
कार्रवाई के दौरान परिवहन मुख्यालय जयपुर और अजमेर की टीमों ने सिर्फ चैसिस वाले चारों वाहनों को सीज कर मांगलियावास थाने में खड़ा करवा दिया है। वहीं, शेष 9 निर्माणाधीन वाहनों को बॉडी निर्माता के परिसर में ही सीज कर उसे पाबंद किया गया है कि प्रकरण के निस्तारण तक इन वाहनों को वर्तमान स्थिति में ही सुरक्षित रखा जाए। जांच दल ने साक्ष्य के तौर पर फोटो और वीडियोग्राफी की है। डीटीओ राजीव शर्मा ने बताया कि यह एक गंभीर अनियमितता है और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट तैयार कर परिवहन आयुक्त को प्रेषित कर दी गई है। कार्रवाई में डीटीओ महेश शर्मा, संजय शर्मा, परिवहन इंस्पेक्टर नवनीत बाटड़ सहित अन्य अफसर शामिल थे।
इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि परिवहन विभाग में नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी ही कई बार कानून की धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं। देखना यह होगा कि अब इस गंभीर लापरवाही और अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है?
भीलवाड़ा हलचल न्यूज़ पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें:
समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: [email protected], व्हाट्सएप: 9829041455)
विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129
संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा
फोन: 7737741455
