मिडिल ईस्ट में युद्ध विराम के संकेत: ट्रंप बोले—'उद्देश्यों के करीब अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर लग सकता है ब्रेक'

मिडिल ईस्ट में युद्ध विराम के संकेत: ट्रंप बोले—उद्देश्यों के करीब अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर लग सकता है ब्रेक
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वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और यूएस-इजरायल के बीच पिछले 22 दिनों से जारी भीषण संघर्ष अब थमने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बड़ी घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को कम करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप के इस बयान से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में आए संकट के दूर होने की उम्मीद जगी है।

ट्रंप का बड़ा एलान: "हम अपने लक्ष्यों के बहुत करीब"

28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) को दहला दिया है। ट्रंप ने लिखा, "ईरान के शासन के संबंध में अपने व्यापक सैन्य प्रयासों को समाप्त करने पर विचार करते हुए, हम अपने उद्देश्यों को पूरा करने के बहुत करीब पहुंच रहे हैं।" इस बयान को ईरान के खिलाफ 'सीजफायर' की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने गिनाए अपने 5 मुख्य उद्देश्य

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस युद्ध में किन लक्ष्यों को हासिल करने की योजना बनाई थी:

मिसाइल क्षमता का खात्मा: ईरान की मिसाइलें, लॉन्चर और संबंधित बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना।

रक्षा आधार को चोट: ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार (Defense Industrial Base) को खत्म करना।

वायु और नौसेना की समाप्ति: ईरान की वायु सेना, नौसेना और विमान भेदी हथियारों को निष्क्रिय करना।

परमाणु अंकुश: ईरान को परमाणु क्षमता के करीब न पहुंचने देना और अमेरिका को हमेशा पलटवार के लिए तैयार रखना।

सहयोगियों की सुरक्षा: इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगियों को सर्वोच्च सुरक्षा प्रदान करना।

होर्मुज स्ट्रेट: "जो इस्तेमाल करे, वही करे सुरक्षा"

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि अमेरिका स्वयं इस मार्ग का उपयोग नहीं करता है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन देशों को उठानी चाहिए जो यहां से अपने तेल और गैस के जहाजों का आवागमन करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि अनुरोध किया गया, तो अमेरिका इन देशों की सहायता करेगा, लेकिन ईरान का खतरा टलने के बाद इसकी जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

ईंधन संकट से दुनिया को मिल सकती है राहत

होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई बाधित होने के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल और गैस की किल्लत पैदा हो गई थी। ट्रंप के इस रुख से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में स्थिरता आने और आपूर्ति बहाल होने की संभावना बढ़ गई है।

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