नैनीताल: किशोर न्याय बोर्ड की कार्यवाही पर हाई कोर्ट की रोक, सहमति के संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

नैनीताल: किशोर न्याय बोर्ड की कार्यवाही पर हाई कोर्ट की रोक, सहमति के संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष लंबित एक जांच मामले में अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने यह आदेश एक नाबालिग (किशोर) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिस पर अपहरण और यौन शोषण के आरोप थे।

मामले की पृष्ठभूमि और अदालती तर्क

न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा (उर्फ आलोक मेहरा) की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी और पीड़िता दोनों की आयु घटना के समय लगभग 15 वर्ष थी और वे पिछले चार वर्षों से गहरे मित्र थे। पीड़िता के पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने किशोर के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था।

बयानों में विरोधाभास और मेडिकल रिपोर्ट

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि:

* धारा 180 (BNSS): पुलिस को दिए बयान में पीड़िता ने किसी भी शारीरिक संबंध से स्पष्ट इनकार किया, हालांकि मित्रता की बात स्वीकार की।

* धारा 183 (BNSS): मजिस्ट्रेट के समक्ष उसने स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के घर गई, उसे अपने घर बुलाया और आपसी सहमति से संबंध बनाए।

* चिकित्सा साक्ष्य: मेडिकल जांच में जबरन यौन संबंध या किसी भी तरह की हिंसा का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

अदालत की टिप्पणी और भविष्य की चिंता

माननीय न्यायालय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस स्तर पर आरोपी को 'सुधार गृह' भेजना उसके भविष्य और करियर की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कोर्ट ने 'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध एवं अन्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के नजीर का उल्लेख करते हुए माना कि किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों में पीड़िता के बयानों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें:

समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: [email protected], व्हाट्सएप: 9829041455)

विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129

संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा

फोन: 7737741455

Next Story