भाव शुद्ध तो घर का पानी भी गंगाजल, चरण उसके छुना जिसका आचरण अच्छा- पंडित प्रदीप मिश्रा

भीलवाड़ा, । श्री महाशिवपुराण कथा श्रवण कराने पहली बार मेवाड़ की पावन धरा भीलवाड़ा में पधारे प्रख्यात कथावाचक ‘कुबेर भण्डारी’ पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारबिंद से कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। हर दिन पिछले दिन से अधिक जनसैलाब होेने से तीन विशाल डोम व पाइप पांडाल युक्त साढ़े चार लाख वर्ग फीट का पांडाल भी छोटा प्रतीत हो रहा ओर अतिरिक्त व्यवस्था बिठाने के लिए की जा रही है। कथा के चौथे दिन शनिवार को हालात ये रहे कि दोपहर एक से पहले ही पांडाल पूरी तरह से भर चुका था ओर विलंब से पहुंचने वालों को बैठने की जगह मिलना भी कठिन हो रहा था। संकटमोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबूगिरीजी महाराज के सानिध्य में हो रही कथा के चौथे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण के विभिन्न प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान को आपकी दौलत नहीं भावना चाहिए। शिव का अभिषेक करने के लिए गंगा यमुना का जल जरूरी नहीं यदि आपकी भावना शुद्ध है तो घर का जल भी गंगाजल व यमुना जल बन जाता है। उन्होंने कहा कि चरण उसके छुना चाहिए जिसका आचरण अच्छा हो। जिसका आचरण अच्छा नहीं वह चाहे कितनी भी उंची गादी पर बैठ जाए उसके चरण नहीं छुना चाहिए। माता-पिता ओर पति के चरण छुने चाहिए। पतियों को भी पत्नी के मन को जान उनका दिल छुने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। जीवन में कितनी भी परेशानी हो चेहरे की मुस्कराहट कभी कम नहीं होनी चाहिए। महाराजश्री ने कहा कि जीवन में गुरू मंत्र से अधिक जरूरी गुरू का मत या विचार जानना है। गुरू के विचारों को अपने जीवन में उतारे। ये कथा शिव का मंत्र नहीं उनका मत देने आई है। शिव का मत जान लिया तो संसार सागर से पार हो जाएंगे। कथा के चौथे दिन कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ पर विराजित पंडित मिश्रा का अभिनंदन करने वालों में निम्बार्क आश्रम भीलवाड़ा के महंत मोहनशरण शास्त्री, हाथीभाटा आश्रम के महंत संतदास महाराज आदि शामिल थे। कथास्थल पर प्रातःकालीन पूजन एवं पौथी पूजन करने वाले जजमान में गजानंद बजाज, नवरतनदेवी बजाज, गिरिराज मोनिका बजाज, कैलाशचन्द्र रतनदेवी गदिया, विनोद सुथार, गोविन्दप्रसाद सोड़ानी, बालूसिंह राजपूत, दीपक तोषनीवाल, राधेश्याम पोरवाल, गणेश दमानी, मदनगोपाल कालरा शामिल थे। चौथे दिन कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती करने वालों में चित्तौड़गढ़ विधायक चन्द्रभानसिंह आक्या, बड़ीसादड़ी के पूर्व विधायक प्रकाशचन्द चौधरी, पूर्व सभापति ओम नराणीवाल, लक्ष्मीनारायण डाड, बाबूलाल जाजू, बनवारीलाल मुरारका, शिव बाल्दी, रामपाल गिरिराज असावा, देवेन्द्र बाफना, आशा सुनील मूंदड़ा, विष्णु ओझा, अनिल सोनी, नरेन्द्र कोठारी, हितेन्द्र सोमानी, अलका नेहा जोशी, गीता पोखरना, राजू बहेड़िया, जगदीश ईनाणी, जगदीश सोमानी, राजेश कुदाल, सत्तू गुगड़, कैलाश गुगड़, कंकूदेवी सुथार, राजेन्द्र कोगटा, हरि अग्रवाल आदि शामिल थे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी ने किया। आभार आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी ने जताया। आयोजन समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जागेटिया ने बताया कि कथा पांडाल में उमड़ रहे श्रद्धालुओं के लिए छाया पानी सहित सभी जरूरी प्रबंध किए जा रहे है ओर आवश्यकतानुसार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कथा समिति के सह संयोजक सत्येन्द्र बिरला ने बताया कि कथा 14 अप्रेल तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगी।

*ऐसा लगता भीलवाड़ा में ‘शिव का कुंभ’ भरा*

पंडित प्रदीप मिश्रा ने भीलवाड़ा में उमड़े रहे श्रद्धा के सैलाब का जिक्र करते हुए आयोजन के प्रेरक संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनकी भावना के कारण ही यहां ये आयोजन हो पाया है। कथा कराना सरल नहीं होता बहुत परीक्षा देनी पड़ती है। श्री शिव महापुराण कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी एवं समिति की सेवा भावना की सराहना करते हुए उनके प्रति भी साधुवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा में 42 डिग्री तापमान में भी गर्मी की परवाह किए बिना जिस कदर श्रद्धालु उमड़ रहे है उसे ऐसा लगता जैसे भीलवाड़ा में ‘शिव का कुंभ’ चल रहा है। रात में कथा पांडाल में ठहरे श्रद्धालु जिस तरह प्रभु भक्ति करते है वह अनुपम है। कथा सुनने आने वाले श्रद्धालुओं की विभिन्न मार्गो पर जिस तरह जल सेवा आदि सेवा कार्य हो रहे है उसके लिए भीलवाड़ा के भक्तगण धन्यवाद के पात्र है ऐसा नजारा कहीं नहीं देखा।

*शिव से मिलना है तो अहंकार का त्याग करो*

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव हमसे धन दौलत नहीं सच्ची भक्ति व विश्वास मांगते है। जिसकी जिंदगी में श्रद्धा ओर विश्वास प्रबल नहीं उसके जीवन में बहुत अड़चने आने से वह सफल नहीं हो सकता। जब तक शिव की कृपा नहीं होगी उनके दर्शन नहीं होंगे। जब तक विश्वास पूर्ण नहीं होगा तब तक शिव नहीं मिल सकते। उन्होंने कहा कि अहंकार लेकर शिव के पास जाएंगे तो वह नहीं मिलेंगे। शिव से मिलने के लिए जीवन में सरलता व सादगी चाहिए। जीवन में मैं ओर मेरा का त्याग करो शिव मिल जाएंगे।

*झूूूूम उठे हजारों श्रद्धालु जब गया ‘कर दिया मालामाल काशी वाले ने’*

कथा के दौरान मंच से मालामाल काशी वाले ने लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने भजन गाए गया तो हजारों महिला श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों पर खड़ा होकर झूमती रही। पांडाल के अंदर हो या बाहर हर तरफ भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालु ऐसे भजनों की रसगंगा में डूबे नजर आए। कथा के दौरान मंच से पंडित मिश्रा ने कुछ श्रद्धालुओं के पत्र पढ़े जिसमें बताया गया था कि उनकी समस्याओं का निदान किस तरह शिव भक्ति से हुआ। ऐसे श्रद्धालुओं को परिवार सहित मंच पर भी बुला पंडित मिश्रा ने अपने हाथों से बिल्व पत्र प्रदान किया।

*कथा से पूर्व श्रद्धालुओं ने किया हनुमान चालीसा का पाठ*

श्री महाशिवपुराण कथा शुरू होने से पूर्व पांडाल में कथा आयोजन समिति द्वारा दोपहर 12 से एक बजे तक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। कथा पांडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भी पूरी श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए सर्व सुख शांति एवं सर्व मंगल की कामना की। कथास्थल के समीप महाप्रज्ञ भवन में आयोजन समिति के युवा प्रकोष्ठ की ओर से रविवार सुबह 8 से 12 बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन भी होगा।

*प्रतिदिन मंच पर प्रदर्शित हो रही सजीव झांकिया*

कथा में प्रतिदिन विश्राम से पूर्व मंच पर भगवान शिव से जुड़ी अलग-अलग सजीव झांकियों का प्रदर्शन हो रहा है। चौथे दिन भगवान शिव पार्वती के साथ गणेश की सजीव झांकी आकर्षण का केन्द्र रही। कथा में शिव पार्वती, ब्रह्मा विष्णु महेश आदि की सजीव झांकी भी सजाई जा चुकी है। कथास्थल पर प्रतिदिन सुबह 8.30 ओर सुबह 10.30 बजे से पूजा अनुष्ठान भी हो रहा है जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग जजमान शामिल हो रहे है। पंडित अशोक व्यास के निर्देशन में पंडित देवेन्द्र शास्त्री पूजन करा रहे है।

*परेशानी से बचने के लिए समय पूर्व पहुंचे कथा स्थल*

कथा में रविवार को अवकाश का दिन होने से श्रद्धालुओं की ओर अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना के दृष्टिगत श्री शिव महापुराण कथा आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि परेशानी से बचने के लिए समय पूर्व पहुंच अपना स्थान ग्रहण कर ले। कथा स्थल पर पेयजल व जरूरी सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। श्रद्धालुओं से पीने के जल की बोतल साथ रखने का आग्रह किया गया है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं से सोना चांदी के कीमती आभूषण नहीं पहन कर आने की अपील निरन्तर की जा रही है। श्रद्धालुओं से मोबाइल, पर्स आदि कीमती सामग्री का ध्यान भी रखने का निवेदन किया जा रहा है।

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