मेडिकल और लीगल रिपोर्ट अब पूरी तरह डिजिटल होंगी, 1 फरवरी से हाथ से लिखी रिपोर्ट अमान्य

भीलवाड़ा हलचल । जिले में मेडिकल जूरिस्ट और अन्य शिक्षकों द्वारा जारी की जाने वाली मेडिकल और लीगल रिपोर्ट अब पूरी तरह डिजिटल और कंप्यूटराइज्ड होंगी। इससे रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका खत्म होगी और असली व नकली रिपोर्ट की पहचान भी आसानी से की जा सकेगी।
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार 1 फरवरी 2026 से किसी भी डॉक्टर या अधिकारी द्वारा हाथ से लिखी गई रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। इसके स्थान पर केवल सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की गई डिजिटल रिपोर्ट ही स्वीकार की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य सरकार को 1 फरवरी तक का समय दिया है। तय समयसीमा के बाद यदि लापरवाही सामने आती है, तो इसके लिए संबंधित जांच अधिकारी और एसपी को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह सख्त फैसला हाथ से लिखी गई रिपोर्टों की अव्यवहारिक स्थिति को देखते हुए लिया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिपोर्ट में क्या लिखा है, यह समझ में ही नहीं आ रहा। इसी के बाद हाईकोर्ट ने नियमों में बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य मेडिको लीगल दस्तावेज हाथ से नहीं बनाए जाएंगे।
हाईकोर्ट के नए आदेशों के अनुसार सभी रिपोर्ट डिजिटल सिस्टम से तैयार की जाएंगी। रिपोर्ट साफ सुथरी भाषा में बड़े कैपिटल अक्षरों में होंगी और उनके साथ टाइप की हुई प्रति भी संलग्न की जाएगी। डिजिटल रिपोर्ट में क्रॉस राइटिंग या ओवरलैपिंग की कोई संभावना नहीं रहेगी।
इसके साथ ही हर डिजिटल रिपोर्ट में क्यूआर कोड और संबंधित डॉक्टर या विशेषज्ञ के असली हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। क्यूआर कोड के माध्यम से रिपोर्ट की सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी। पैथोलॉजिस्ट की राय और निष्कर्ष भी डिजिटल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएंगे और उनके हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने से डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट आसानी से समझ में आ सकेगी। वर्तमान में डॉक्टर और पुलिस अधिकारी पोस्टमार्टम सहित कई अहम रिपोर्ट हाथ से लिखकर देते हैं, जो अक्सर पढ़ने में अस्पष्ट होती हैं। नए आदेश के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में छेड़छाड़ की संभावना होगी खत्म
ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से रिपोर्टों के साथ छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो जाएगी। पोस्टमॉर्टम के बाद रिपोर्ट तुरंत ऑनलाइन तैयार हो जाएगी, जिससे पहले की तरह दो से तीन घंटे तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुराने रिकॉर्ड भी पुलिस अधिकारी ऑनलाइन देख सकेंगे और न्यायालय में रिपोर्ट पेश करने की प्रक्रिया भी सरल होगी।
