सगे बेटे के खिलाफ मां की गवाही, भाई की पत्नी से ज्यादती करने वाले दोषी को 10 साल की जेल

जोधपुर। रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाले एक सनसनीखेज मामले में जोधपुर की पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने सगे छोटे भाई की पत्नी से दुष्कर्म करने और दूसरे भाई की पत्नी से दुष्कर्म का प्रयास करने वाले दोषी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी दोषी की अपनी मां की गवाही रही, जिन्होंने अदालत में अपने बेटे के खिलाफ खड़े होकर सच का साथ दिया।

मां के सामने ही की थी दरिंदगी की कोशिश

मामले के अनुसार, 10 मार्च 2021 को आरोपी ने अपने एक छोटे भाई की पत्नी के साथ उस वक्त दुष्कर्म किया जब वह घर से बाहर गई थी। लोकलाज के डर से पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई। आरोपी के हौसले इतने बुलंद हो गए कि 4 जुलाई 2021 की रात उसने अपने दूसरे छोटे भाई की पत्नी के साथ भी दुष्कर्म का प्रयास किया। उस समय पीड़िता अपनी सास (आरोपी की मां) के पास सो रही थी। पीड़िता के चिल्लाने पर उसकी सास ने बीच-बचाव किया, जिससे घबराकर आरोपी वहां से भाग गया। इसके बाद 6 जुलाई 2021 को पीपाड़ शहर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।

फैसले में रामचरितमानस और मनुस्मृति के श्लोकों का जिक्र

विशेष न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने 54 पन्नों के विस्तृत फैसले में 'श्रीरामचरितमानस', 'मनुस्मृति' और ‘बृहस्पति-स्मृति’ के श्लोकों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कड़ा संदेश देते हुए लिखा कि जो व्यक्ति भाई की पत्नी पर कुदृष्टि डालता है, वह अत्यंत दुष्ट है। कोर्ट ने माना कि बिना दंड के समाज में अराजकता (मत्स्य-न्याय) फैल जाएगी, जहां ताकतवर कमजोर को निगल जाएगा।

सजा और भारी जुर्माना

अदालत ने आरोपी को तीन अलग-अलग धाराओं में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है:

धारा 376(2)(एफ): 10 साल का कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माना।

धारा 376/511 (बलात्कार का प्रयास): 5 साल का कठोर कारावास और 25,000 रुपये जुर्माना।

धारा 354 (लज्जा भंग): 3 साल का कठोर कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना।

कुल 85 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है और कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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