चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का फर्जीवाड़ा उजागर: 20 राजनीतिक दलों की मिलीभगत का पर्दाफाश

भीलवाड़ा( हलचल)। पिछले महीना भीलवाड़ा के कई देश भर चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथी अन्य लोगों पर आयकर विभाग में छापा मारा था जिसे लेकर काफी चर्चाएं चली लेकिन अब इसके परिणाम सामने आ गए हैं,आयकर रिटर्न जमा करने के दौरान टैक्स में छूट पाने के लिए फर्जीवाड़ा करने के मामले में 20 राजनीतिक दलों की संलिप्तता का खुलासा हुआ है। ये सभी पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं, जिनमें से तमाम एक कमरे के कार्यालय से संचालित होते हैं। टैक्स में छूट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और अधिवक्ता इन दलों को दान (डोनेशन) देने का फर्जीवाड़ा करते हैं, जबकि इन दलों द्वारा दान की रकम का एक हिस्सा बतौर कमीशन लेकर वापस कर दिया जाता है।
आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बीती 14 जुलाई को देश भर में चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ताओं, बिचौलियों आदि के 150 से अधिक ठिकानों पर छापा मारकर इस फर्जीवाड़े के प्रमाण जुटाए गए थे। जांच में सामने आया कि वाराणसी में चार्टर्ड अकाउंटेंट दो सगे भाई इस तरह की धोखाधड़ी में संलिप्त हैं, जिसके बाद उनके ठिकानों को खंगालने पर फर्जी जानकारी देकर आयकर रिटर्न जमा करने के पुख्ता सुराग हाथ लगे थे। जांच में सामने आया कि कोरोना महामारी के बाद इस तरह के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि हाल ही में केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने जिन 119 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उनकी निष्क्रियता की वजह से कारण बताओ नोटिस थमाया है, उनमें आयकर जांच के दायरे में आए ये 20 दल शामिल हैं।
57 लोगों ने भरा संशोधित रिटर्न
इस खुलासे के बाद आयकर विभाग ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के नाम पर आयकर रिटर्न में फर्जीवाड़ा करने वाले 59 लोगों को नोटिस जारी किया, जिसमें से 57 ने अपना संशोधित रिटर्न जमा कर दिया है। साथ ही, उन्होंने अपनी गलती को भी स्वीकार किया है। अब आयकर विभाग उन सरकारी कर्मचारियों पर शिकंजा कसने जा रहा है, जो अन्य नियमों के तहत फर्जी आंकड़ा देकर टैक्स की छूट ले रहे थे।
अधिकतर के कार्यालय दूसरे राज्यों में
आयकर विभाग ने इस फर्जीवाड़े का पता लगाने के लिए बिचौलियों के कंप्यूटर के आईपी एड्रेस का पता लगाया। जिसके बाद उनके ठिकानों पर छापा मारकर सुबूत जुटाए। जांच में समाने आया कि तमाम चार्टर्ड अकाउंटेंट पर्दे के पीछे से कुछ टैक्स प्रैक्टिशनर के जरिये यह काम कराते हैं।
भीलवाड़ा में ऐसे टैक्स प्रैक्टिशनर के ठिकाने पिछले दिनों खंगाले जा चुके हैं। जल्दी इस बात खुलासा हो सकता की इनकी क्या भूमिका रही ओर इस पर क्या कार्यवाही हो सकती हे।
🗞️ भीलवाड़ा (हलचल)।
देशभर में इनकम टैक्स विभाग की हालिया कार्रवाई ने बड़ा खुलासा किया है। भीलवाड़ा सहित कई शहरों में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अधिवक्ताओं ने आयकर छूट पाने के लिए फर्जी डोनेशन दिखा कर टैक्स बचाने का घोटाला किया। इस फर्जीवाड़े में 20 पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल शामिल पाए गए हैं।
ये दल अधिकतर एक कमरे के ऑफिस से संचालित होते हैं और टैक्स में छूट के लिए डोनेशन की रकम फर्जी दिखाते हैं। बदले में यह रकम कमीशन के साथ वापिस कर दी जाती है।
🔍 पिछले महीने पड़ी थी आयकर विभाग की रेड
इनकम टैक्स विभाग ने देशभर में 150 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकील और बिचौलिए शामिल थे।
वाराणसी में दो सगे चार्टर्ड अकाउंटेंट भाई इस फर्जीवाड़े के मुख्य खिलाड़ी निकले। इन पर छापा मारने के बाद इनकम टैक्स रिटर्न में हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिले। भीलवाड़ा में इसी मामले को लेकर कई चार्टर्ड और अन्य लोगों के यहां छापे डाले गए थे।
🦠 कोविड के बाद घोटालों में इजाफा
कोरोना महामारी के बाद ऐसे मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई।
हाल ही में चुनाव आयोग ने 119 गैर मान्यता प्राप्त दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिनमें से 20 दल इस टैक्स फर्जीवाड़े की जांच में भी नामित हैं।
🔁 57 लोगों ने गलती मानी, संशोधित रिटर्न दाखिल किया
इनकम टैक्स विभाग ने 59 लोगों को नोटिस भेजे, जिनमें से 57 ने गलती स्वीकारते हुए संशोधित रिटर्न दाखिल किया।
अब विभाग का अगला निशाना वे सरकारी कर्मचारी हैं जो टैक्स में छूट पाने के लिए झूठे आंकड़े दिखा रहे थे!
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📍 भीलवाड़ा में भी छापे, जल्द बड़ा खुलासा संभव
भीलवाड़ा में टैक्स प्रैक्टिशनर के ठिकानों पर छापेमारी पहले ही हो चुकी है।
सूत्रों की मानें तो जल्द ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि स्थानीय स्तर पर किनकी क्या भूमिका रही और किस पर क्या कार्यवाही की हो सकती हे इस पर निगाहे लगी हे!
🧠 विशेष जांच के बिंदु:
फर्जी डोनेशन बनाम असली ट्रांजेक्शन
आईपी एड्रेस से बिचौलियों की पहचान
टैक्स प्रैक्टिशनर की भूमिका
एक कमरे से संचालित राजनीतिक दलों की नेटवर्किंग
अन्य टैक्स कटौती वाले मामलों में भी कार्रवाई
केवल फर्जी चंदे ही नहीं, बल्कि नकली मेडिकल खर्च, बनावटी ट्यूशन फीस और दवा बिलों के सहारे टैक्स छूट लेने वालों पर भी आयकर विभाग की नजर है. ऐसे मामलों में भी कुछ जगह छापेमारी की गई है.
