ईरान में कोहराम: प्रदर्शनों में 2000 मौतों की पहली बार आधिकारिक पुष्टि, सुलगते हालातों के बीच अमेरिका-इजरायल पर मढ़ा दोष

ईरान में कोहराम: प्रदर्शनों में 2000 मौतों की पहली बार आधिकारिक पुष्टि, सुलगते हालातों के बीच अमेरिका-इजरायल पर मढ़ा दोष
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​तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान में पिछले तीन सालों से जारी आर्थिक और राजनीतिक असंतोष अब एक खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने पहली बार स्वीकार किया है कि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में अब तक 2000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में आम नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।

​ईरान सरकार का दावा: 'आतंकवादियों' ने फैलाया खून

​ईरानी नेतृत्व ने इन मौतों की जिम्मेदारी लेने के बजाय इसका दोष 'बाहरी तत्वों' और 'आतंकवादियों' पर मढ़ा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनों की आड़ में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ बताते हुए उन पर देश को अस्थिर करने का आरोप लगाया है।

​बदतर आर्थिक हालात बनी विद्रोह की वजह:

​जानकारों का मानना है कि इस बार के विरोध प्रदर्शनों की जड़ में ईरान की खराब आर्थिक स्थिति, कमरतोड़ महंगाई और बेरोजगारी है। अमेरिकी प्रतिबंधों और आंतरिक कुप्रबंधन के कारण आम जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है, जो अब ईरान की सरकार के लिए पिछले तीन दशकों की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

​वैश्विक प्रतिक्रिया और ट्रंप का 'एक्शन':

​ईरान में बढ़ते दमन को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप का यह कदम ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

​भारत पर पड़ सकता है असर:

​ईरान में अस्थिरता और अमेरिका के सख्त रुख का सीधा असर भारत पर भी पड़ने की संभावना है:

​चाबहार पोर्ट: भारत द्वारा संचालित चाबहार बंदरगाह परियोजना के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा सकते हैं।

​तेल की कीमतें: यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित होंगी।

​अपडेट: कई मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि वास्तविक मौतों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा (6000 से 12000 के बीच) हो सकता है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण खबरें बाहर नहीं आ पा रही हैं।

​दुनिया भर की ऐसी ही खबरों के सटीक विश्लेषण के लिए पढ़ते रहें 'भीलवाड़ा हलचल'।

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