बढ़ती लागत ने तोड़ी फार्मा निर्यातकों की कमर: 30% महंगी हुई पैकेजिंग, अब सरकारी 'सब्सिडी' का इंतजार

दिल्ली। वैश्विक बाजार में भारतीय दवाओं का डंका बजाने वाले फार्मा निर्यातक इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में 30 प्रतिशत से अधिक की बेतहाशा वृद्धि ने दवाओं की उत्पादन लागत को आसमान पर पहुँचा दिया है। लागत में हुए इस भारी इजाफे के कारण अब एमएसएमई (MSME) श्रेणी के फार्मा निर्यातकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी से बिगड़ा गणित
फार्मा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल की कीमतों में उछाल ने मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया है। कच्चे माल के साथ-साथ अब डिब्बों, बोतलों और अन्य पैकेजिंग सामानों के दाम बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर वित्तीय बोझ असहनीय स्तर तक पहुँच गया है।
फ्रेट सब्सिडी की उठी मांग: लॉजिस्टिक्स का बोझ कम करे सरकार
इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए फार्मा निर्यातकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। निर्यातकों की मांग है कि सरकार बढ़ती लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत को संतुलित करने के लिए 'फ्रेट (परिवहन) सब्सिडी' प्रदान करने पर गंभीरता से ध्यान दे। यदि सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और परिवहन में राहत नहीं मिली, तो दवाओं के निर्यात ग्राफ में बड़ी गिरावट आ सकती है।
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