मनरेगा बचाओ संग्राम, कांग्रेस का 45 दिन का आंदोलन शुरू 12 को रखेंगे उपवास जाट

मनरेगा बचाओ संग्राम, कांग्रेस का 45 दिन का आंदोलन शुरू 12 को  रखेंगे उपवास जाट
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भीलवाड़ा हलचल। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम और प्रावधानों में किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने 45 दिवसीय आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन को मनरेगा बचाओ संग्राम नाम दिया गया है। इसके तहत कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।

शनिवार को भीलवाड़ा में देहात कांग्रेस की ओर से पत्रकार वार्ता सर्किट हाउस में हुई, जहां देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना मुख्य मुद्दा नहीं है, बल्कि इसकी मूल भावना को कमजोर किया जाना सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय दिया गया काम का अधिकार अब धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है।

भाजपा की केंद्र सरकार मनरेगा योजना को कमजोर कर गरीब और मजदूर वर्ग की आजीविका पर सीधा हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों का विरोध करेगी।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर यह 45 दिवसीय अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। अभियान की शुरुआत 10 जनवरी को सभी जिलों में पत्रकार वार्ताओं से हुई है। 12 जनवरी को उपवास रखा जाएगा, इसके बाद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर चौपालों पर मनरेगा को लेकर चर्चा करेंगे और लोगों को जागरूक करेंगे। अभियान के अंतिम चरण में जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा।


मनरेगा की आत्मा से छेड़छाड़ का आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कांग्रेस नेता जाट ने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना की मूल भावना को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र अगर मनरेगा का नाम बदलना चाहता है तो यह उसका अधिकार हो सकता है, लेकिन योजना की नीति और मंशा में किया गया पूर्ण बदलाव किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। जाट ने कहा कि मौजूदा बदलावों से मनरेगा की आत्मा ही बदल दी गई है और नई नीतियों का उद्देश्य गरीबों को राहत देना नहीं बल्कि उनकी रोजी-रोटी पर चोट करना है।

जाट ने कहा कि यह वही मजदूर वर्ग है जिसने अपने पसीने से देश को खड़ा किया है। सड़कों, खेतों, कारखानों और ऊंची इमारतों से लेकर छोटे औजारों और बड़े जहाजों तक, हर निर्माण में मजदूरों की मेहनत शामिल है। इसके बावजूद आज सबसे ज्यादा हमले उसी मेहनतकश वर्ग पर किए जा रहे हैं, जो देश की नींव है।

उन्होंने मनरेगा की फंडिंग का 40 फीसदी बोझ राज्यों पर डालने के फैसले का भी कड़ा विरोध किया। जाट ने इसे पूरी तरह से गैर वाजिब और संघवाद विरोधी कदम बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले से सीमित संसाधनों से जूझ रहे राज्य सरकारें इस अतिरिक्त बोझ को कैसे उठाएंगी। उनके अनुसार यह संघीय ढांचे पर सीधा हमला है और कल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने की साजिश है।

जाट ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और गरीब विरोधी बदलाव तुरंत वापस लिए जाएं। उन्होंने कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और तेज किया जाएगा। जाट ने साफ चेतावनी दी कि जब तक केंद्र सरकार मजदूर विरोधी नीतियां वापस नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

नाम बदलने के मुद्दे पर जाट ने कहा कि केवल नाम बदलना समस्या नहीं है, लेकिन राम जी के नाम का उपयोग इस तरह के बदलावों के लिए करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में राम जी के नाम पर गरीबों और मजदूरों के हित में बदलाव किए जाते तो सभी इसके लिए तैयार होते, लेकिन मौजूदा फैसले उस भावना के विपरीत हैं।


इस मौके पर प्रशांत बेरवा, अक्षय त्रिपाठी, कैलाश व्यास ओम नाराणीवाल, महेश सोनी आदि मौजूद थे।

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