स्थाई लोक अदालत का बड़ा फैसला:: कैंसर के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना गलत, कंपनी को 5.55 लाख भुगतान के आदेश

कैंसर के आधार पर बीमा क्लेम खारिज करना गलत, कंपनी को 5.55 लाख भुगतान के आदेश
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भीलवाड़ा (बीएचएन)। स्थाई लोक अदालत, भीलवाड़ा ने बीमा क्लेम के एक महत्वपूर्ण मामले में परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कैंसर जैसी बीमारी के आधार पर बीमा क्लेम निरस्त करना न्यायोचित नहीं है। अध्यक्ष शहाबुद्दीन, सदस्य गोवर्धन सिंह कावडिय़ा और डॉ. सुमन त्रिवेदी की पीठ ने विपक्षी बीमा कंपनी को परिवादी को कुल 5 लाख 55 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।

क्या था पूरा मामला?

आसीन्द तहसील के गुदा का खेड़ा निवासी भैरूलाल कुमावत ने अदालत में परिवाद पेश किया था। परिवादी के पिता स्वर्गीय उगमा कुमावत ने 30 दिसंबर 2022 को एक ट्रैक्टर खरीदा था, जिसके लिए अडाणी कैपिटल प्रा. लि. से ऋण लिया गया था। इस ऋण की सुरक्षा के लिए कोटक महिन्द्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया गया था, जिसकी शर्त थी कि वाहन स्वामी की मृत्यु होने पर शेष ऋण माफ कर दिया जाएगा। 23 अप्रैल 2023 को बीमित उगमा कुमावत का निधन हो गया, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया और फाइनेंस कंपनी ने एनओसी जारी नहीं की।

बीमा कंपनी के तर्क को अदालत ने नकारा

बीमा कंपनी ने अदालत में तर्क दिया कि बीमित ने पॉलिसी लेते समय अपने स्वास्थ्य की सही जानकारी छिपाई थी। कंपनी के अनुसार, बीमित पूर्व में जयपुर के भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर का इलाज करा चुके थे, जिसका उल्लेख 'गुड हेल्थ डिक्लेरेशन' में नहीं किया गया था। इस आधार पर कंपनी ने क्लेम निरस्त करना सही बताया।

अदालत का आदेश

मामले की सुनवाई के बाद स्थाई लोक अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यद्यपि बीमित का कैंसर का इलाज चला था, लेकिन केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मृत्यु अवश्यंभावी थी। अदालत ने टिप्पणी की कि कैंसर जैसी बीमारी का इलाज संभव है और ऐसे मरीज पूर्णत: स्वस्थ भी हो सकते हैं, इसलिए केवल बीमारी का उल्लेख न करने के आधार पर क्लेम निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कोटक महिन्द्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वे परिवादी को बीमा क्लेम राशि 5,50,000 रुपये एवं वाद व्यय के 5,000 रुपये सहित कुल 5,55,000 रुपये दो माह की अवधि में अदा करें। यदि इस निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो परिवादी विपक्षी कंपनी से 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

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