भीलवाड़ा: मनरेगा की नीतियों में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल, हजारों ने रखा उपवास

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भीलवाड़ा | अंकुर विजय:

केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नाम में परिवर्तन और इसकी नीतियों में किए गए बदलावों के विरोध में आज भीलवाड़ा शहर कांग्रेस ने हुंकार भरी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष शिवराम खटीक की अगुवाई में आयोजित इस 'उपवास कार्यक्रम' में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग शामिल हुए।

​ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर पहुंचे कार्यकर्ता

​आंदोलन का नजारा उस वक्त देखने लायक था जब जिले भर से ग्रामीण, महिलाएं और पुरुष जीपों, ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों में सवार होकर रैली के रूप में निकले। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता की यह विशाल रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए भोपाल क्लब चौराहा पहुंची, जहां सभी ने एकजुट होकर उपवास रखा और सरकार के फैसलों के खिलाफ विरोध जताया।


कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने मनरेगा बचाओ संग्राम में शामिल होकर उपवास किया।


इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव गुर्जर ने कहा कि आज हमने महात्मा गांधी की मूर्ति के समक्ष उपवास रखकर आंदोलन का संकल्प लिया है,जब तक किसानों को किसानों का अधिकार वापस नहीं मिल जाता तब तक कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक लड़ती रहेगी। इस कड़ी में आज हमने भीलवाड़ा में गांधी जी मूर्ति के सामने उपवास करके गांधी के चरणों में इस बात का संकल्प लिया है कि किसानों को उनका रोजगार दिलाने का अधिकार, ग्रामीण भारत को सुधार करने का सपना पूरा करने का अधिकार, मनरेगा योजना से बीजेपी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे।


​"ग्रामीणों के हक पर कुठाराघात"

​उपवास स्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शहर अध्यक्ष शिवराम खटीक ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

​"केंद्र सरकार द्वारा योजना का नाम बदलना फिर भी स्वीकार्य है, लेकिन इसकी मूल नीतियों में बदलाव करना ग्रामीण क्षेत्र के गरीब लोगों के हितों पर सीधा कुठाराघात है। मनरेगा ग्रामीणों की आजीविका का आधार है और इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

​आंदोलन की चेतावनी

​कांग्रेस पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह उपवास तो केवल शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार अपनी नीतियों में बदलाव की मांग को वापस नहीं लेती और ग्रामीणों के हितों की रक्षा सुनिश्चित नहीं करती, तब तक यह आंदोलन और भी उग्र रूप में जारी रहेगा।

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