सहमति से बने किशोर संबंधों को आपराधिक रंग देना न्यायसंगत नहीं- राजस्थान हाईकोर्ट

सहमति से बने किशोर संबंधों को आपराधिक रंग देना न्यायसंगत नहीं- राजस्थान हाईकोर्ट
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जोधपुर। सुप्रीम कोर्ट के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट ने भी पॉक्सो (POCSO) कानून के दुरुपयोग को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' जोड़ने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि सहमति से बने किशोर संबंधों को आपराधिक रंग देना न्यायसंगत नहीं है और इससे युवाओं का भविष्य अनावश्यक रूप से नष्ट होता है।

न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने एक ऐतिहासिक और रिपोर्टेबल फैसले में केंद्र सरकार और विधि निर्माताओं से आग्रह किया कि वे POCSO अधिनियम में “Close-in-Age Exception” (निकट आयु अपवाद) जैसा प्रावधान जोड़ें, ताकि 16 से 18 वर्ष के बीच आपसी सहमति से बने संबंधों में अदालतें परिस्थितियों के अनुसार विवेकपूर्ण निर्णय ले सकें।

'रोमियो-जूलियट' प्रकृति के मामलों पर कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि देशभर में दर्ज POCSO मामलों का बड़ा हिस्सा ऐसे मामलों का है, जहां दो किशोर या किशोर-युवा आपसी सहमति से रिश्ते में होते हैं, लेकिन पारिवारिक या सामाजिक विरोध के कारण मामला गंभीर आपराधिक धाराओं में दर्ज कर दिया जाता है।

अदालत ने चेताया कि POCSO जैसे कठोर कानून का यांत्रिक और अंधाधुंध इस्तेमाल न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यह कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है, न कि सहमति आधारित रिश्तों को अपराध ठहराने के लिए।

क्या था मामला?

मामला जयपुर ग्रामीण का है। वर्ष 2025 में एक 19 वर्षीय युवक के खिलाफ 17 वर्षीय लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और यौन शोषण के आरोप में POCSO और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और विशेष POCSO अदालत ने आरोप तय कर दिए। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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