महाराष्ट्र में युवक की संदिग्ध मौत,: भील समाज ने 6 घंटे घेरा आसींद थाना, नौकरी, मुआवजे व एफआईआर दर्ज करने की मांग
आसींद मंजूर। मजदूरी के लिए महाराष्ट्र गये बराणा की झोंपडिय़ा गांव के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से खफा आदिवासी भील समाज आज शव के साथ आसींद थाने पहुंच गया। आक्रोशित लोगों ने छह घंटे तक थाने का घेराव कर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। ये लोग, मृतक आश्रितों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ गये। एसडीएम परमजीत सिंह के आश्वासन के बाद लोगों ने धरना-प्रदर्शन खत्म कर दिया।
प्रदर्शनकर रहे लोगों ने बताया कि बराणा की झोंपडिय़ा गांव का रमेश 35 पुत्र भंवरलाल भील एक ठेकेदार के अधीन मजदूरी करने महाराष्ट्र के नासिक गया था। जहां रमेश की एक फरवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शव रेलेव ट्रैक पर मिला। आरोप है कि रेलवे पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को वहीं दफना दिया । इसकी सूचना भी परिजनों को नहीं दी गई।
इसका पता चलने पर परिजन वहां गये और प्रशासन से स्वीकृति लेने के बाद दफनाये गये रमेश के शव को बाहर निकलवाया, जिसे आज आसींद लाया गया।
उधर, सुबह करीब आठ बजे बड़ी संख्या में लोग शव लेकर आसींद थाने के बाहर जुट गये। ये लोग थाने का घेराव कर नारेबाजी करने लगे। इन लोगों ने मृतक रमेश के आश्रितों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी देने के साथ ही शव का दुबारा पोस्टमार्टम कराने, ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पुलिस के सामने रखी है। डीएसपी ओमप्रकाश सिंह सौलंकी व आसींद थाना प्रभारी ने समझाइश कर लोगों को आश्वस्त किया कि जो भी उचित कार्रवाई होगी, वो की जायेगी। इसके बावजूद लोग अड़े रहे। बाद में एसडीएम परमजीत सिंह ने मृतक आश्रितों को सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना, विधवा पेंशन, पालन हार योजना और पीएम आवास योजना का लाभ देने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही लोगों का गुस्सा शांत हो सका। प्रदर्शन सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चला। प्रदर्शन को देखते हुये आसींद पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये।
