भीलवाड़ा पुलिस की कार्रवाई:: अंतरजातीय विवाह पर 'शोक संदेश' छपवाने वाले पिता को किया पाबंद, बोला- खराब हो गई थी छवि, इसलिए..!

भीलवाड़ा बीएचएन | "पुत्री द्वारा अंतरजातीय विवाह करने से मेरी सामाजिक छवि खराब हो गई, जल्दबाजी में मेरा विवेक काम नहीं कर पाया और मैंने जीते जी अपनी बेटी का त्याग कर शोक संदेश छपवा दिया।" यह स्वीकारोक्ति एक पिता ने शक्करगढ़ पुलिस के समक्ष दी। इस संवेदनशील मामले में भीलवाड़ा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिता को सामाजिक कुरीतियों को बढ़ावा न देने और मृत्युभोज जैसी गतिविधि न करने के लिए पाबंद किया है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई कार्रवाई
जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के आदेशानुसार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शाहपुरा) राजेश कुमार आर्य के निर्देशन में पुलिस ने इस प्रकरण में तत्परता दिखाई। जहाजपुर वृत्ताधिकारी रेवड़मल मौर्य के सुपरविजन में बालिग युवती की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष कदम उठाए गए।
क्या है पूरा मामला?
शक्करगढ़ थाना क्षेत्र की एक 27 वर्षीय बालिग युवती ने अपनी इच्छा से कोटपूतली निवासी युवक के साथ आर्य समाज में अंतरजातीय विवाह किया था। विवाह के बाद युवती कुछ समय के लिए अपने पीहर आई हुई थी। जब उसका पति उसे लेने पहुंचा, तो परिजनों ने विरोध किया और पीछा करने लगे। मामला थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने दोनों पक्षों की समझाइश की। युवती ने वीडियोग्राफी के सामने स्पष्ट बयान दिया कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है और वह अपने पति के साथ जाना चाहती है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दंपति को सुरक्षित जयपुर रवाना किया।
शोक संदेश पर पुलिस का कड़ा रुख
इस विवाह से क्षुब्ध होकर पिता ने अपनी जीवित बेटी का 'शोक संदेश' और 'त्याग पत्र' छपवा दिया था, जिसमें "कुल की मर्यादा तोडऩे" का हवाला दिया गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पिता को तलब किया। पूछताछ में पिता ने स्वीकार किया कि जल्दबाजी और सामाजिक प्रतिष्ठा के दबाव में उन्होंने यह कदम उठाया था। उन्होंने पुलिस को आश्वस्त किया कि अब वे कोई भी मृत्युभोज या शोक बैठक आयोजित नहीं करेंगे।
निरोधात्मक कार्यवाही
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने संज्ञेय अपराध निवारण हेतु पिता के विरुद्ध धारा 126/135 बीएनएसएस के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए इस्तगासा न्यायालय में पेश किया है।
