सैकड़ों बीघा चारागाह भूमि पर अवैध पेड़ों के कटान पर एनजीटी सख्त, कलेक्टर सहित 7 को नोटिस

भीलवाड़ा के बनेड़ा क्षेत्र में चारागाह भूमि पर हुए पर्यावरण विनाश के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। लाखों पेड़ों की अवैध कटाई और कोयला बनाने के इस खेल में अब प्रशासन की जवाबदेही तय होगी।
भीलवाड़ा। जिले के बनेड़ा तहसील के बामनिया गांव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने कड़ा फैसला सुनाया है। बामनिया गांव की करीब 2000 बीघा चारागाह भूमि से लाखों विलायती बबूल और अन्य कीमती पेड़ों के अवैध कटान व कोयला बनाने के मामले में ट्रिब्यूनल ने जिला कलेक्टर सहित 7 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
आरोप है कि बामनिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में सरकारी और चारागाह भूमि पर लगे लाखों पेड़ों को बिना किसी वैध नीलामी के काट दिया गया।
भ्रष्टाचार का आरोप: भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर करीब 25 लाख रुपये से अधिक की सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुँचाया है।
पर्यावरण को क्षति: विलायती बबूल की आड़ में नीम और खेजड़ी जैसे संरक्षित पेड़ों को भी काट दिया गया और अवैध कोयला भट्ठियां संचालित की गईं।
आरटीआई का खुलासा: ग्राम पंचायत ने सूचना के अधिकार के तहत स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी कटाई के लिए कोई नीलामी नहीं की गई थी।
NGT की बड़ी कार्रवाई: जॉइंट कमेटी गठित
न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और डॉ. सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया है। इसमें भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि,वन संरक्षक (भीलवाड़ा) के प्रतिनिधि, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
6 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि यह समिति तत्काल स्थल का दौरा करेगी और 6 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस जांच के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च, 2026 को होगी।
