बजरी संकट: 93 लीज निरस्त होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, राहत की उम्मीद

बजरी संकट: 93 लीज निरस्त होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, राहत की उम्मीद
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भीलवाड़ा। भीलवाड़ा सहित प्रदेश के चार जिलों में 93 बजरी लीज निरस्त करने के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। खान विभाग ने एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर करने की तैयारी पूरी कर ली है। सरकार को उम्मीद है कि यदि ये लीज बहाल होती हैं, तो प्रदेश में बजरी के दाम 30 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

राजस्व का नुकसान और बजरी माफिया का दबदबा

हाई कोर्ट द्वारा भीलवाड़ा, बाड़मेर, टोंक और सिरोही में नीलामी निरस्त किए जाने से खान विभाग को सालाना 200 करोड़ रुपये के राजस्व और रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर, लीज बंद होने का फायदा उठाकर बजरी माफिया सक्रिय हो गए हैं। जो डंपर पहले 15 हजार रुपये में आता था, वह अब साठगांठ के चलते 25 से 30 हजार रुपये में बिक रहा है। अवैध खनन और तेज रफ्तार डंपरों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

क्यों निरस्त हुई थीं लीज?

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि सरकार ने नीलामी के समय सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के नियमों का उल्लंघन किया है। नियमों के मुताबिक, किसी क्षेत्र में लीज खत्म होने के बाद 5 साल तक खनन प्रतिबंधित रहना चाहिए ताकि नदियों में बजरी की 'नेचुरल रीप्लेनिशमेंट' (प्राकृतिक भरपाई) हो सके। कोर्ट ने इसी आधार पर नीलामी रद्द कर जमा राशि लौटाने के निर्देश दिए थे।

उम्मीद की किरण

खान विभाग अब सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगा कि इन लीजों के शुरू होने से न केवल अवैध खनन पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकारी खजाने में राजस्व भी आएगा और निर्माण कार्य की लागत में कमी आएगी।

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