'क्वीन ऑफ हार्ट्स' AI: अब सेकंडों में होगी हार्ट अटैक की पहचान, मरीजों के लिए बनेगा वरदान

नई दिल्ली। भारत और फ्रांस ने दिल्ली में आयोजित दुनिया के पहले एआई सम्मेलन में "एआई और हेल्थ" क्षेत्र में सहयोग के लिए हाथ मिलाया है। इसी बीच एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में 'क्वीन ऑफ हार्ट्स' (Queen of Hearts) नामक एआई प्लेटफॉर्म को लेकर चौंकाने वाले और राहत भरे परिणाम सामने आए हैं। यह तकनीक साइलेंट अटैक और स्ट्रोक जैसे खतरों को सेकंडों में पहचान कर मरीजों को नया जीवन देने में सक्षम है।
पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा सटीक है AI
अमेरिका और बेल्जियम के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों द्वारा 8,116 मरीजों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि एआई तकनीक ने 92% मामलों में सटीक पहचान की, जबकि पारंपरिक तरीकों की सफलता दर केवल 71% थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने 'फाल्स पॉजिटिव' यानी गलत अलार्म के मामलों को 42% से घटाकर मात्र 8% कर दिया, जिससे डॉक्टरों का कीमती समय बचेगा।
90 मिनट का 'गोल्डन ऑवर' और AI की भूमिका
हार्ट अटैक के इलाज में हर एक मिनट कीमती होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अटैक के 90 मिनट के भीतर इलाज शुरू न हो, तो मृत्यु का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है। 'क्वीन ऑफ हार्ट्स' एआई उन सूक्ष्म संकेतों (Subtle Signs) को भी पकड़ लेता है जो अनुभवी डॉक्टरों या मानक ईसीजी मशीनों से छूट जाते हैं। यह तकनीक ईसीजी रिपोर्ट को सेकंडों में पढ़कर डॉक्टरों को तत्काल निर्णय लेने में मदद करती है।
भारतीय मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण
लैंसेट और बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में लगभग 55% मौतें समय पर इलाज न मिलने के कारण होती हैं और 50% मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में यह एआई तकनीक भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है, जिससे समय रहते इलाज शुरू कर हजारों जानें बचाई जा सकेंगी।
