बड़ी कार्रवाई: JJM घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार, कोर्ट में पेश

बड़ी कार्रवाई: JJM घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार, कोर्ट में पेश
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जयपुर । राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1988 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी की टीम ने गुरुवार को उन्हें दिल्ली से दबोचा, जिसके बाद शुक्रवार को जयपुर के मिनी सचिवालय स्थित एसीबी कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट में पेशी के दौरान जब मीडिया ने उनसे सवाल पूछे, तो उन्होंने संक्षिप्त में केवल इतना कहा, "मेरे वकील आपको सब बताएँगे।" फिलहाल कोर्ट में भारी गहमागहमी का माहौल है और न्यायाधीश ने उन्हें कुछ समय इंतजार कराने के बाद बुलाया।

एसीबी का 'ऑपरेशन सुबोध' और रिमांड की तैयारी

सुबोध अग्रवाल लंबे समय से एसीबी की रडार पर थे। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और 'लुक आउट नोटिस' भी जारी हो चुका था। एसीबी डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली में उनकी लोकेशन ट्रैक कर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। अब एसीबी कोर्ट से उनकी अधिकतम पुलिस रिमांड की मांग करेगी ताकि 960 करोड़ रुपये के इस विशाल घोटाले में रिश्वत के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य 'सफेदपोशों' का खुलासा किया जा सके।

क्या है 960 करोड़ का JJM घोटाला?

यह घोटाला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'हर घर नल से जल' योजना से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामले सामने आए हैं:

फर्जी सर्टिफिकेट: मैसर्स गणपति ट्यूबवैल और मैसर्स श्याम ट्यूबवैल जैसी फर्मों ने इरकॉन (IRCON) के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों के टेंडर हथिया लिए।

मिलीभगत के आरोप: आरोप है कि सुबोध अग्रवाल को इन फर्जी दस्तावेजों की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर इन फर्मों को फायदा पहुँचाया।

लापरवाही: 50 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स में अधिकारियों को मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करना था, लेकिन ऑफिस में बैठकर ही फाइलें क्लियर कर दी गईं।

रिटायरमेंट के कुछ माह बाद ही सलाखों के पीछे

सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाते थे, जो 31 दिसंबर 2025 को रिटायर हुए थे। एसीबी ने इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें जलदाय विभाग के 9 अधिकारी भी शामिल हैं। रिटायरमेंट के महज कुछ महीनों के भीतर हुई इस गिरफ्तारी से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है।

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