मास्टर प्लान में भ्रष्टाचार की 'मास्टर' प्लानिंग: भीलवाड़ा और सीकर के जोनल प्लान निरस्त, MNIT प्रोफेसर पर उठे गंभीर सवाल

भीलवाड़ा/सीकर। राजस्थान के शहरी नियोजन (Town Planning) में भ्रष्टाचार का एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने प्रतिष्ठित संस्थान MNIT की साख और पिछली सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भीलवाड़ा के जोनल प्लान और सीकर के मास्टर प्लान में हुए भारी फर्जीवाड़े को देखते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इन्हें निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया है।
भीलवाड़ा से सीकर तक 'सेटिंग' का खेल?
आरोप है कि भीलवाड़ा जोनल प्लान और सीकर मास्टर प्लान को तैयार करने वाले MNIT जयपुर के एसोसिएट प्रोफेसर नंदराम ने शिक्षण कार्य से ज्यादा दिलचस्पी नेताओं के दफ्तरों के चक्कर काटने में दिखाई। चर्चा है कि मास्टर प्लान में जमीनों का भू-उपयोग (Land Use) मनमाने ढंग से बदलने के लिए करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ। प्रोफेसर के अभी भी कांग्रेसी नेताओं से नजदीकी संपर्क होने के दावे किए जा रहे हैं।
खेल मैदानों की बलि चढ़ाकर 'कमाई' की तैयारी
विवाद की सबसे बड़ी वजह जनहित की अनदेखी है। जिन जमीनों को बच्चों के लिए खेलकूद मैदान (Playground) या ओपन स्पेस के तौर पर सुरक्षित रखा जाना था, उन्हें 'अदृश्य' निर्देशों के बाद “अन्य उपयोग (Any Other Use)” में डाल दिया गया। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मास्टर प्लान की आत्मा की हत्या करने जैसा है, ताकि रसूखदार लोग उन जमीनों पर व्यावसायिक फायदा उठा सकें।
मंत्री की खरी-खरी: सैटेलाइट नक्शों से हुआ 'फर्जीवाड़ा'
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस राज में तैयार यह प्लान केवल सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित था, जिसमें जमीनी हकीकत (Physical Verification) को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
"सीकर मास्टर प्लान में 5000 से ज्यादा आपत्तियां इस भ्रष्टाचार की गवाह हैं। अब मास्टर प्लान केवल कागजों पर नहीं, बल्कि मौके पर भौतिक सत्यापन के बाद ही फाइनल होगा।" - झाबर सिंह खर्रा, मंत्री
MNIT की साख पर लगा बट्टा
एक प्रतिष्ठित संस्थान के प्रोफेसर की भूमिका संदिग्ध होने से शिक्षा जगत में भी खलबली है। अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच हो ताकि यह साफ हो सके कि खेल मैदानों को खुर्द-बुर्द करने के पीछे किन-किन 'बड़े चेहरों' के विशेष हित काम कर रहे थे। क्या प्रोफेसर नंदराम पर जवाबदेही तय होगी? यह भीलवाड़ा और सीकर की जनता के बीच बड़ा सवाल बना हुआ है।
