भीलवाड़ा : जल जीवन मिशन में 187 करोड़ का महाघोटाला,: मांडल XEN सिद्धार्थ टांक सहित 3 बड़े अफसरों पर FIR

मांडल XEN सिद्धार्थ टांक सहित 3 बड़े अफसरों पर FIR
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​भीलवाड़ा/मांडल हलचल । राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की आंच अब भीलवाड़ा जिले तक पहुंच गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जिले के सहाड़ा, रायपुर और सुवाणा क्षेत्र में पाइपलाइन और जलापूर्ति कार्यों में हुए 187.33 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने PHED मांडल के अधिशासी अभियंता (XEN) सिद्धार्थ टांक सहित विभाग के तीन आला अधिकारियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है।​एसीबी की इस कार्रवाई से भीलवाड़ा PHED महकमे में हड़कंप मचा हे।


​इन बड़े अफसरों पर गिरी गाज

​एसीबी द्वारा दर्ज FIR में मुख्य रूप से तीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है:

​सिद्धार्थ टांक: अधिशासी अभियंता (XEN), परियोजना खंड मांडल, भीलवाड़ा।

​दिनेश गोयल: तत्कालीन मुख्य अभियंता (Special Projects), PHED।

​महेंद्र प्रकाश सोनी: तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (SE), अजमेर (वर्तमान में सेवानिवृत्त)।

​जांच में सामने आया है कि हैदराबाद की कंपनी भूरथनोम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपए के टेंडर दिलाने के लिए अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया। कंपनी ने चंबल-भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना के अधूरे काम को कागजों में पूरा बताकर झूठे शपथ पत्र पेश किए थे। अधिकारियों ने इन फर्जी दस्तावेजों को सही मानते हुए कंपनी को टेंडर के लिए योग्य घोषित कर दिया।

​क्या है पूरा फर्जीवाड़ा?

​अधूरा काम, पूरा भुगतान: सहाड़ा-रायपुर-सुवाणा क्षेत्र में कई गांवों में अभी तक कमीशनिंग और स्काडा (SCADA) का काम बाकी था, लेकिन अफसरों की मिलीभगत से इसे पूरा दिखा दिया गया।

​ब्लैकलिस्ट होने से बचाया: जून 2023 में शिकायतें मिलने के बावजूद अधिकारियों ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसे बचाने के लिए रिपोर्ट में संशोधन किया।

​5 बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर: इसी फर्जीवाड़े के दम पर कंपनी ने भीलवाड़ा के अलावा नागौर, बांसवाड़ा, सीकर और ईसरदा के करीब 1493 करोड़ रुपए के कुल 5 बड़े प्रोजेक्ट्स में एंट्री पा ली।

​स्काडा और कमीशनिंग में खेल

​बता दें कि 'स्काडा' तकनीक के जरिए पानी की सप्लाई और लीकेज की ऑनलाइन निगरानी होती है, जबकि 'कमीशनिंग' पाइपलाइन की टेस्टिंग का अंतिम चरण होता है। इन महत्वपूर्ण कार्यों के बिना ही प्रोजेक्ट को पूरा बता देना जनता के हक के पैसे और पानी के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है।

​एसीबी की इस कार्रवाई से भीलवाड़ा PHED महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की जांच अब आगे की कड़ियों और रिश्वत के लेनदेन तक पहुंचने की संभावना है।

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