भ्रष्टाचार के 'खिलाड़ी' कॉन्स्टेबल पर एफआईआर: 10 हजार की घूस के लिए मोबाइल पर लिखा था 'रेट'

भीलवाड़ा BHN . राजस्थान पुलिस की वर्दी पहनकर वसूली करने का मामला सामने आया है। माण्डल थाने में तैनात कॉन्स्टेबल धर्मेंद्र चौधरी (बेल्ट नं. 468)ने एक परिवादी से उसके पारिवारिक विवाद को निपटाने के नाम पर खुलेआम रिश्वत की डिमांड कर डाली। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस सिपाही के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7के तहत मुकदमा दर्ज कर उसकी गर्दन नाप ली है।
जबान से नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर दिखाया रिश्वत का 'रेट'
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कॉन्स्टेबल की शातिर कार्यप्रणाली को लेकर हुआ है। जब परिवादी नारायण गुर्जर और उसका साथी राजू धोबी मांडल थाने के पास एक जूस की दुकान पर कॉन्स्टेबल से मिले, तो आरोपी इतना शातिर था कि उसने अपने मुँह से पैसे नहीं मांगे। उसने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर '10' लिखकर दिखाया, जिसका मतलब था 10,000 रुपये। जब परिवादी ने कहा कि यह बहुत ज्यादा है, तो सौदा 7,000 रुपये में तय हुआ।
सत्यापन के दौरान ही झटक लिए 2,000 रुपये
ACB की जांच में सामने आया है कि 02 अक्टूबर 2025 को जब सत्यापन की कार्रवाई चल रही थी, तब आरोपी धर्मेंद्र ने परिवादी से 2,000 रुपये मौके पर ही वसूल लिए। बाकी के 5,000 रुपये अगले दिन सुबह 11 बजे देना तय हुआ था। पूरी बातचीत को ACB के डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर (DVR) में कैद कर लिया गया, जो अब इस भ्रष्ट पुलिसकर्मी के लिए काल बन चुका है।
भनक लगते ही पलटा, लेकिन कानून के शिकंजे से नहीं बच पाया
शातिर कॉन्स्टेबल को शायद ACB की भनक लग गई थी, इसलिए उसने बाद में रंग बदलते हुए रिश्वत लेने से इनकार कर दिया और समझौता कराने की बात करने लगा। लेकिन वह यह भूल गया कि ACB की डिजिटल डायरी में उसकी घूसखोरी की एक-एक सेकंड की रिकॉर्डिंग दर्ज हो चुकी थी।
ACB की बड़ी कार्रवाई: रिकॉर्डिंग और साक्ष्यों ने खोली पोल
एडिशनल एसपी विक्रम सिंह और उप अधीक्षक हरिश्चंद्र सिंह के नेतृत्व में चली इस लंबी जांच के बाद, ACB ने तकनीकी साक्ष्यों (पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और हैश वैल्यू) के आधार पर आरोपी धर्मेंद्र बुगालिया के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
> "खाकी की आड़ में वसूली करने वालों के लिए यह एक कड़ा संदेश है। आरोपी कॉन्स्टेबल के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं।" — एसीबी
अब इस मामले की जांच एडिशनल एसपी विक्रम सिंह को सौंपी गई है। भीलवाड़ा पुलिस महकमे में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
