200 बीघा गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी

कोटा । कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में शुक्रवार को कुदरत और सिस्टम की मार ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी। पुराने पेट्रोल पंप के पास स्थित खेतों में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे करीब 200 बीघा में खड़ी गेहूं की सुनहरी फसल जलकर खाक हो गई। तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया।
इन किसानों के आशियाने और फसलें उजड़ी:
आगजनी की इस घटना ने कई परिवारों के सालभर के निवाले को छीन लिया है। प्रभावित किसानों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
जगदीश मीणा (कचोलिया): 54 बीघा खेत की पूरी फसल जल गई।
महावीर मीणा (जालमपुरा): 14 बीघा में से करीब 6 बीघा फसल राख हुई।
अन्य प्रभावित किसान: गिर्राज जांगिड़, किशन कुमार मेघवाल, चंद्रप्रकाश सुमन, अब्दुल राहुफ लाहौरी, राजेश और सीताराम मेघवाल के खेतों में भी भारी नुकसान हुआ है।
दमकल की देरी और बिजली विभाग पर फूटा गुस्सा:
घटना की सूचना पर सुल्तानपुर थाना अधिकारी दौलत साहू जाप्ते के साथ मौके पर पहुँचे और दीगोद व अन्य स्थानों से दमकलें बुलवाईं। हालांकि, किसानों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दमकलें समय पर नहीं पहुँचीं और जो आईं उनमें पानी का प्रेशर बेहद कम था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली के तारों में शॉर्ट-सर्किट (स्पार्किंग) से आग भड़की थी। किसानों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि आग लगने के काफी देर बाद तक बिजली सप्लाई बंद नहीं की गई, जिससे चिंगारियां गिरती रहीं और आग फैलती गई।
4 महीने की मेहनत मिनटों में खाक:
प्रभावित किसानों ने रुआंसे स्वर में बताया कि पिछले चार महीनों से दिन-रात एक करके उन्होंने यह फसल तैयार की थी। अब जब कटाई का समय करीब था, तब इस अग्निकांड ने उनके लाखों रुपये के नुकसान के साथ-साथ भविष्य की उम्मीदों को भी जला दिया है। ग्रामीणों और दमकलकर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक खेत के खेत राख के ढेर में तब्दील हो चुके थे।
